प्रदेश सरकार अनुदानित विद्यालयों में कार्यरत तदर्थ शिक्षकों व प्रधानाचार्यों के विनियमितीकरण पर इसी माह में सकारात्मक निर्णय लेगी। विधान परिषद में सभापति के निर्देश के बाद सरकार ने सदन को यह आश्वासन दिया है।
शिक्षक दल के नेता ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने शून्यकाल में यह औचित्य का सवाल उठाया। उन्होंने बताया कि सरकार माध्यमिक शिक्षा अधिनियम 1921 के तहत विनियमितीकरण के आदेश जारी करती रही है।
प्रधानाचार्य बनने के लिए शिक्षण अनुभव अनिवार्य है। माध्यमिक विद्यालयों में कम से कम चार वर्ष का अनुभव आवश्यक होता है। वर्तमान में एडेड माध्यमिक विद्यालयों में 80 फीसदी से अधिक प्रधानाचार्य तदर्थ रूप से कार्यरत हैं। यह प्रकरण बीते फरवरी में भी सदन में उठाया गया था। उस समय भी पीठ से स्पष्ट व्यवस्था दी गई थी। इसके बावजूद अब तक कोई निर्णय नहीं किया जा सका है।
भाजपा सदस्य उमेश द्विवेदी, मानवेंद्र सिंह और हरी सिंह ढिल्लो ने भी इस प्रश्न का समर्थन किया। इस पर सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह ने नेता सदन केशव प्रसाद मौर्य को निर्देश दिए। उन्होंने नेता सदन से कहा कि वे इसी महीने में बैठक करें। सभापति ने इस बैठक में तदर्थ शिक्षकों के विनियमितीकरण पर निर्णय लेने को कहा।