भाजपा में 98 संगठनात्मक जिलों में नए जिलाध्यक्षों की नियुक्ति के लिए लखनऊ से दिल्ली तक दौड़ शुरू हो गई है। पार्टी ने आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर करीब 50 फीसदी तक जिलाध्यक्ष बदलने के संकेत दिए हैं, इसके मद्देनजर मौजूदा महानगर और जिलाध्यक्ष अपनी कुर्सी बचाने और दावेदार कुर्सी हथियाने के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं।
पार्टी ने जिलाध्यक्षों की नियुक्ति के लिए पर्यवेक्षक तैनात किए हैं। पर्यवेक्षक संबंधित जिलों का दौरा कर स्थानीय सांसद, विधायक, एमएलसी, प्रदेश पदाधिकारी व क्षेत्रीय पदाधिकारी से संवाद कर तीन-तीन नामों का पैनल 15 जुलाई तक महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह को सौंपेंगे।
प्रदेश में लगातार दूसरी बार भाजपा की सरकार होने और लोकसभा चुनाव नजदीक होने के चलते जिलाध्यक्ष पद की दौड़ लंबी है। प्रत्येक जिले में जिलाध्यक्ष पद के लिए मजबूत दावेदारों की लंबी सूची है। दावेदारों ने लखनऊ में पार्टी के प्रदेश मुख्यालय से लेकर दिल्ली में पार्टी के राष्ट्रीय नेताओं से भी संपर्क साध रहे हैं। पार्टी के प्रदेश पदाधिकारियों के राजधानी स्थित आवास पर भी सुबह शाम जिलाध्यक्ष के दावेदारों की भीड़ जुट रही है।
सूत्रों का कहना है कि जिलाध्यक्षों की नियुक्ति में आरएसएस की राय को भी महत्व दिया जाएगा। ऐसे में संघ पृष्ठभूमि से जुड़े दावेदार संघ के प्रमुख पदाधिकारियों से भी संपर्क साध रहे हैं। सांसद और विधायक भी अपने करीबी कार्यकर्ताओं को जिलाध्यक्ष बनवाने के लिए पैरवी कर रहे हैं।
क्षेत्रवार होगा जातीय संतुलन
भाजपा पदाधिकारी ने बताया कि जिलाध्यक्षों की नियुक्ति में क्षेत्रवार जातीय संतुलन भी किया जाएगा। पश्चिम में जाट, गुर्जर, सैनी, पाल, वैश्य, ब्राह्मण, ठाकुर, जाटव, कोरी सहित अन्य जातियों को महत्व दिया जाएगा। वहीं पूर्वांचल में राजभर, निषाद, यादव, कुर्मी, मौर्य, ब्राह्मण, ठाकुर, भूमिहार समाज के नेताओं को जिलाध्यक्ष नियुक्त कर जातीय संतुलन बनाया जाएगा। इसी प्रकार अन्य क्षेत्रों में भी वहां की प्रमुख जातियों को प्रतिनिधित्व दिया जाएगा।
विधानसभा चुनाव से लेकर जनसंपर्क अभियान तक रहेगा आधार
भाजपा मौजूदा जिलाध्यक्षों को एक मौका और देने के लिए विधानसभा चुनाव 2022 में उनके क्षेत्र में रहे परिणाम, चुनाव में उनकी भूमिका, नगरीय निकाय चुनाव में उनकी भूमिका, महाजनसंपर्क अभियान की सफलता को आधार बनाएगी।
कच्चे चिट्ठे भी खुलने लगे
भाजपा में जिलाध्यक्ष पद के दावेदारों ने मौजूदा जिलाध्यक्षों की खिलाफत के लिए लखनऊ से दिल्ली तक उनकी शिकायतें की है। जिलाध्यक्षों पर चुनाव में टिकिट वितरण में गड़बड़ी करने, पार्टी के अभियानों और कार्यक्रमों का संचालन ठीक नहीं करने, कार्यकर्ताओं के साथ व्यवहार को लेकर भी शिकायतें की जा रही है। वहीं विधायकों की ओर से भी जिलाध्यक्षों के खिलाफ विधानसभा चुनाव में उनकी खिलाफत करने जैसी शिकायतें प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी और महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह तक की गई है।