ऐसे होता है खेल
औषधि निर्माता एवं विपणनकर्ता कंपनियां अपने सीएंडएफ एजेंट, सुपर डिस्ट्रीब्यूटर अथवा स्टॉकिस्ट के माध्यम से चिकित्सकों और अस्पतालों/नर्सिंग होम को विशेष छूट देती हैं। कई मामलों में कंपनियां अथवा सीएंडएफ एजेंट दवाओं की बिलिंग संबंधित चिकित्सक या अस्पताल/नर्सिंग होम के नाम पर करने के बजाय अपने स्टॉकिस्ट के नाम पर करते हैं।
इसके बाद स्टॉकिस्ट द्वारा बिल में निर्दिष्ट चिकित्सक, अस्पताल अथवा नर्सिंग होम के बजाय किसी अन्य औषधि विक्रेता या फर्म को दवाओं की आपूर्ति कर दी जाती है। ऐसे में डॉक्टर के नाम पर आने वाली दवा का मुनाफा स्टाकिस्ट कमाते हैं। कई बार विशेष छूट अथवा सस्ती दवाओं की आड़ में फर्जी बिल तैयार कर नकली और काउंटरफिट दवाओं की बिक्री की जाती है। पिछले दिनों चले अभियान में इस तरह के केस पकड़े गए हैं।
शेड्यूल एच, एच1 और एक्स दवाओं के लिए पर्चा अनिवार्य
औषधि नियमावली के प्रावधानों के अनुसार चिकित्सकीय परामर्श पर विक्रय की जाने वाली दवाओं- शेड्यूल एच, एच1 और एक्स की आपूर्ति के संबंध में भी निर्देश स्पष्ट किए गए हैं। इन दवाओं की आपूर्ति पंजीकृत चिकित्सक, अस्पताल, डिस्पेंसरी और नर्सिंग होम को उनके लिखित एवं हस्ताक्षरित क्रय आदेश पर ही की जाएगी। संबंधित क्रय आदेश की प्रति को कम से कम दो वर्ष तक सुरक्षित रखना भी अनिवार्य होगा।