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किसानों की जिंदगी की कीमत 1067 करोड़ रुपये

Thu, 09 Apr 2015 01:05 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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प्रदेश में बेमौसम बारिश व ओलों से प्रभावित किसानों के फसलों के नुकसान की हकीकत देखने के लिए कृषि मंत्रालय के एक उच्चस्तरीय दल ने सूबे में डेरा डाल दिया है।
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यह दल अपने तीन दिवसीय दौरे में 15 जिलों में नुकसान का जायजा लेगा। बुधवार को दल के सदस्य जिलों के लिए रवाना होंगे, उसके पहले मुख्य सचिव आलोक रंजन ने उनके साथ बैठक की। रंजन ने बताया कि आपदा प्रभावित 40 जिलों में राहत के लिए 1067 करोड़ रुपये का मेमोरेंडम केंद्र को भेजा जा रहा है।

केंद्रीय दल का नेतृत्व कृषि मंत्रालय में संयुक्त सचिव डॉ. आशीष भूटानी कर रहे हैं। बैठक में टीम के सदस्यों ने मुख्य सचिव को बताया कि केंद्र ने लघु एवं सीमांत किसानों को 4500 रुपये प्रति हेक्टेयर व सिंचित क्षेत्र में 9000 रुपये प्रति हेक्टेयर दी जाने वाली रकम को डेढ़ गुना करने का फैसला किया है।
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इसके अलावा 50 प्रतिशत के स्थान पर अब न्यूनतम 33 प्रतिशत नुकसान पर ही मुआवजा दिया जा सकेगा।
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इन जिलों में फसल का जायजा लेगा दल

बैठक में दल के सदस्यों के अलावा कृषि उत्पादन आयुक्त आनंद मिश्र, प्रमुख सचिव राजस्व सुरेश चंद्रा व राहत आयुक्त लीना जौहरी आदि वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

केंद्रीय दल तीन अलग-अलग समूह में ओलों व बेमौसम बारिश से प्रभावित 15 जिलों में फसलों के नुकसान का जायजा लेगा। इन जिलों में झांसी, महोबा, जालौन, हमीरपुर, कानपुर नगर, कानपुर देहात, उन्नाव, इटावा, कन्नौज, बदायूं, बरेली, शाहजहांपुर, पीलीभीत, संभल, ललितपुर व चित्रकूट शामिल हैं।

मुख्य सचिव आलोक रंजन ने कहा कि प्रदेश सरकार ने केंद्र से लघु व सीमांत किसानों को दी जाने वाली सहायता की रकम क्रमश: 4500 व 9000 रुपये प्रति हेक्टेयर को बढ़ाकर दोगुना करने और नुकसान का मुआवजा 50 प्रतिशत के स्थान पर 25 प्रतिशत पर दिए जाने की मांग की थी। इस पर केंद्र ने सहायता राशि बढ़ाकर दोगुनी औैर सहायता के लिए नुकसान का मानक 50 से घटाकर 33 प्रतिशत करने का संकेत किया है।
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