जनता दल परिवार जल्द ही साइकिल पर सवार हो जाएगा। छह दलों का विलय करके नई पार्टी बनाने की घोषणा 20 अप्रैल से पहले हो जाएगी। नई पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव होंगे और दो-तीन दिन में वे ही विलय की तारीख का औपचारिक ऐलान करेंगे। नए दल के नाम में ‘समाजवादी’ जोड़ने और ‘साइकिल’ सिंबल पर किसी को ऐतराज नहीं है।
जनता दल के टूटने के बाद उसके नेता समाजवादी पार्टी, जनता दल (यू), जनता दल (एस), इंडियन नेशनल लोकदल और समाजवादी जनता पार्टी नाम से अलग-अलग दल चला रहे हैं।
इन सभी को फिर से एकजुट करके नई पार्टी बनाने की कोशिशें अंजाम तक पहुंच गई है। सभी छह दलों का विलय करके नई पार्टी के गठन की औपचारिक घोषणा के लिए सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव को अधिकृत किया गया है।
वे पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा और हरियणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला समेत सभी दलों के नेताओं से बातचीत कर चुके हैं।
किसी को नहीं साइकिल निशान से आपत्ति
जनता दल (यू) के महासचिव व सांसद केसी त्यागी ने बताया कि सभी दलों ने विलय के लिए सहमति जता दी है। 20 अप्रैल को संसद सत्र के दूसरे चरण से पहले सभी दलों का विलय हो जाएगा।
त्यागी ने बताया कि विलय की औपचारिक घोषणा करने के लिए मुलायम सिंह यादव को अधिकृत किया गया है। वही नई पार्टी के नेता होंगे। वे सबसे सीनियर हैं और अन्य नेता उनके साथ काम कर चुके हैं।
उन्होंने कहा कि जनता दल परिवार के किसी भी घटक को नई पार्टी का चुनाव चिह्न ‘साइकिल’ रखे जाने पर आपत्ति नहीं है। नए दल में समाजवादी नाम जुड़ा रहे, इसे लेकर भी सभी में सहमति है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही विलय की तिथि की घोषणा हो जाएगी लेकिन इसका फैसला मुलायम ही लेंगे। त्यागी ने बताया कि दूसरे गैरकांग्रेसी, गैरभाजपा दलों से भी संपर्क बना हुआ है। आने वाले समय में वे भी नए दल का हिस्सा हो सकते हैं।
राष्ट्रीय पार्टी के मुखिया हो जाएंगे मुलायम
जनता दल परिवार के घटक दलों के विलय के बाद बनने वाली नई पार्टी की कमान मुलायम सिंह यादव के हाथों में रहेंगी। वे पार्टी अध्यक्ष के साथ ही संसदीय दल के नेता भी होंगे। नए दल में लोकसभा के 15 और राज्यसभा के 30 सांसद होंगे।
ये सांसद यूपी, बिहार, कर्नाटक, हरियाणा आदि राज्यों से आएंगे। ऐसा पहली बार होगा जब मुलायम ऐसे दल के अध्यक्ष होंगे जिसका कई राज्यों में व्यापक जनाधार रहेगा।
हालांकि, मुलायम की छवि राष्ट्रीय नेता की है, लेकिन उनकी समाजवादी पार्टी को राष्ट्रीय दल की मान्यता नहीं मिल पाई है। नए दल का स्वरूप राष्ट्रीय होगा।
पहला लिटमस टेस्ट बिहार में
जनता दल परिवार ‘एक नाम-एक निशान’ के साथ बिहार विधानसभा चुनाव में उतरेगा। नए दल की पहली परीक्षा इसी साल के आखिर में बिहार में होगी। यदि नया दल बिहार में भाजपा को रोकने में सफल रहा तो इसका असर यूपी समेत अन्य राज्यों की राजनीति पर भी पड़ेगा।