राज्यमंत्री का नाम लेते ही चकाचौंध भरी जिंदगी सामने आती है। लेकिन प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री में शुमार होने वाले बहराइच के बलहा विधानसभा क्षेत्र के बंशीधर बौद्ध की तस्वीर इससे कुछ इतर है। वर्ष 2015 के उपचुनाव में बसपा छोड़कर सपा में शामिल होने वाले बंशीधर बौद्ध चुनाव जीतकर सदन पहुंचे।
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विधायक वंशीधर
कभी जंगल की रखवाली करते थे फिर जनता के चौकीदार बने। फिर भी गोबर सानी और खेत की जोताई से सुबह होती है।
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खेती से चलाते हैं घर का खर्च
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वंशीधर
परिवार को राजनीति से लेनादेना नहीं। 17वीं विधानसभा की जंग में मैदान में ताल ठोंक रहे हैं, लेकिन जीतने या हारने की चिंता नहीं। बोले जनता के लिए जिंदगी जी रहा हूं, जीतू या हारूं, उससे क्या मतलब।
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वंशीधर
सादगी के बल पर राज्यमंत्री का ओहदा पा गए। एक वक्त घर का खर्चा चलाने के लिए वंशीधर ने पंचर भी जोड़ा है। लालबत्ती में नईबस्ती गांव पहुंचे, लेकिन जस के तस रहे। न तो पक्का घर बना न ही राज्यमंत्री की ऐंठ चेहरे पर आ सकी।
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वंशीधर
अहाते में मवेशियों की गोबर सानी से सुबह होती है। इसका खुलासा अमर उजाला ने जनवरी 2015 ने किया था। खेत जोतते हुए बंशीधर बौद्ध की तस्वीर सामने आई तो प्रदेश ही नहीं देश चौंका। फिर प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री का ओहदा मिला।
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वंशीधर
बेटी प्रमिला और भतीजी की शादी में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी जंगल के बीच बसे नईबस्ती गांव में बंशीधर बौद्ध के छप्पर तक पहुंचे। जिसके चलते रुतबा और बढ़ा। लेकिन इस रुतबे का असर यह हुआ कि अब तक बंशीधर के घर में सिर्फ सोलर लाइट ही लग सकी है। हालांकि वंशीधर और उनकी पत्नी का कहना है, बसपा में भी रहा लेकिन मायावती कभी यहां नहीं आई, अखिलेश का दिल बड़ा है उन्होंने बेटी की शादी में आकर उन्हें आशीर्वाद दिया था।
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वंशीधर
चार पहिया गाड़ी के नाम पर स्कार्पियो है। नईबस्ती गांव निवासी बंशीधर बौद्ध मऊ जिले के मूल निवासी हैं। वर्ष 1970 में बंशीधर के पिता जंगल में आकर बस गए थे। फिर वह यहीं के होकर रह गए। बंशीधर के नाम 30 बीघा जमीन है। इसमें 18 बीघा जमीन घाघरा के कछार में पड़ती है। जिसके चलते छह महीने खेती नहीं हो पाती।
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वंशीधर
गृहस्थी चलाने के लिए घर के सामने स्थित सेंट्रल फार्म में पहले चौकीदारी करते थे। फार्म बंद होने के बाद कुछ दिनों तक गिरिजापुरी में साइकिल का पंक्चर बनाया। इसके साथ ही खेती संभाली। आज भी खेती से ही घर का काम चलता है। पत्नी बोली राजनीति से नहीं वास्ता, करते घरबार का काम वंशीधर की पत्नी लज्जावती सामान्य गृहणी हैं।
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वंशीधर
पति वंशीधर की गैरमौजूदगी में खेत, अहाते समेद सारा काम निपटाती हैं। बोलीं कि पढ़ते थे, तब खेलकूद में रुचि थी। इसके बाद बसपा के नेता बने। जिला पंचायत सदस्य बने और फिर सपा के टिकट से विधायक बन गए।
उनकी पत्नी का कहना है, राजनीति से मुझे लेनादेना नहीं। लज्जावती ने बताया कि उनके पांच बेटे व तीन बेटियां हैं। बेटियों की शादी हो चुकी है। वह अपना घर संभालती हैं। बेटे बेरोजगार हैं।