मनरेगा को लेकर केंद्र और उत्तर प्रदेश के बीच सियासत तेज हो गई है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने चालू सत्र की पहली तिमाही में मनरेगा के पैसे के कम खर्च का ठीकरा राज्य सरकार पर फोड़ा है।
वहीं प्रदेश के ग्राम्य विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अरविंद कुमार सिंह गोप ने इसके लिए केंद्र को जिम्मेदार ठहराया है।
गोप ने कहा है कि प्रदेश की योजना के संबंध में केंद्रीय मंत्री ने जो टिप्पणी की है, वह गलत है। अन्य राज्यों की अपेक्षा उप्र में मनरेगा की प्रगति चौथे नंबर पर है।
दरअसल, केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को पत्र लिखकर यूपी में मनरेगा के काम में सुस्ती का आरोप लगाया है।
साथ ही उनसे इस कार्य में व्यक्तिगत ध्यान देने का आग्रह किया है। गोप ने केंद्रीय मंत्री के इसे पत्र का कड़ा प्रतिवाद किया है। यहां जारी एक बयान में गोप ने कहा, केंद्र ने यूपी को अन्य राज्यों की अपेक्षा देर से और कम बजट दिया।
पहले ही क्यों न मिली रकम
केंद्र पर प्रदेश के साथ उपेक्षा का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि तमिलनाडु और आंध्रप्रदेश को शुरुआत में ही 1400 और 2400 करोड़ रुपये दे दिए गए जबकि हमें अप्रैल के अंत में धन मिला।
यूपी को भी यदि शुरू में ही पैसा मिल गया होता, तो मनरेगा की प्रगति किसी भी वजह से प्रभावित नहीं होने पाती।
प्रदेश ने उपलब्ध धनराशि का 33 प्रतिशत खर्च कर लिया था। उन्होंने बताया कि, केंद्र ने अप्रैल के अंत में रकम उपलब्ध कराई।
गुमराह हो रहे हैं जयराम
गोप ने यह भी कहा, जयराम रमेश का व्यक्तित्व बहुत बड़ा है। इसके बावजूद ऐसी टिप्पणी उनके पद एवं गरिमा को शोभा नहीं देती। केंद्रीय मंत्री के बयान से लगता है कि केंद्र के अधिकारी कहीं न कहीं उन्हें गुमराह कर रहे हैं।
गोप ने जयराम के पत्र पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि, पिछले दिनों उनके द्वारा इसी तरह की भ्रामक खबर देने पर प्रदेश सरकार को इसका खंडन करना पड़ा था।