प्रदेश के महिलाओं में खून की कमी को देखते हुए उनके इलाज की पुख्ता रणनीति बनाई गई है। इसके लिए सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में मैटरनल एनीमिया मैनेजमेंट सेंटर बनाया जाएगा। यहां महिलाओं की खून की जांच की जाएगी। अस्पतालों में एनीमिया पीड़ित महिलाओं को भर्ती करने के लिए अलग से वार्ड बनेगा।
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार 15 से 19 साल की 59.1 फीसदी और 15 से 49 साल की 52.2 फीसदी गर्भवती एनीमिया की चपेट में हैं। इनमें गर्भावस्था के दौरान कई तरह की समस्या होती है। प्रदेश में लागू की गई नई जनसंख्या नीति में जच्चा-बच्चा मृत्यूदर रोकने का संकल्प लिया गया है। इसमें पांच साल तक के बच्चों में कुपोषण की दर 17.9 फीसदी को 2026 तक घटाकर 16.4 फीसदी करने का लक्ष्य रखा गया है। इसी तरह मातृ मृत्यूदर को घटाने की योजना बनाई गई है।
अभी एक लाख पर मातृ मृत्यूदर 197 है, जिसे 2026 में 150 और 2030 में 98 पर लाने की तैयारी है। इसके लिए गर्भवती महिलाओं का स्वस्थ्य होना जरूरी है। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि एनीमिया को दूर करके जच्चा-बच्चा दोनोंको सुरक्षित किया जा सकता है। इसी के तहत सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में मैटरनल एनीमिया मैनेजमेंट सेंटर खोलने का फैसला लिया गया है।
इस सेंटर में किशोरियों, अस्पताल आने वाली महिलाओंऔर गर्भवती महिलाओं की जांच की जाएगी। खून की जांच के साथ ही उनका शूगर, ब्लड प्रेशर आदि की जांच भी निशुल्क की जाएगी। इसके लिए नर्स को आपाकतकालीन आब्स केयर (इएमओसी) का प्रशिक्षण दिया जाएगा। स्वास्थ्य महानिदेशक डा. वेदब्रत सिंह ने बताया कि एनीमिया की समस्या को दूर करने के लिए यह सेंटर स्थापित किया जाएगा। यदि समय से जांच हो जाएगी और यह बता चल जाएगा कि संबंधित महिला एनीमिया की चपेट में है तो उसका इलाज किया जा सकेगा। एनीमिया की चपेट में आने के कारणों की पड़ताल हो सकेगी।