प्रदेश की जेलों में जाति के आधार पर काम का बंटवारा नहीं होता है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इस पर पूरी तरह पाबंदी का आदेश विभाग द्वारा पहले ही जारी किया जा चुका है। केवल रजिस्टर में जाति का उल्लेख किया जाता है। अब रजिस्टर में जाति का उल्लेख नहीं होने से नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो में भेजे जाने वाले डेटा में बदलाव सामने आ सकता है। सूत्रों की मानें तो जेल में सफाई का कार्य करने वाले अनुसूचित जाति के बंदियों को अधिक पारिश्रमिक के साथ सजा में छूट भी मिलती है। जानकारों के मुताबिक केवल हरियाणा और राजस्थान में बावरिया जाति से जुड़े बंदियों को लेकर अंग्रेजों के बनाए जेल मैनुअल में कुछ नियम बनाए गए थे। सभी राज्यों में लागू अंग्रेजों के बनाए जेल मैनुअल में बंदी को जिस कार्य में महारत हासिल है, वह कार्य कराने का प्रावधान किया गया था।