मिर्जापुर : यहां करीब ढाई लाख निषाद मतदाता हैं। यह सीट अपना दल (सोनेलाल) के खाते में है। सपा ने राजेश एस बिंद को मौका दिया है।
फतेहपुर : यहां करीब दो लाख निषाद वोटर हैं। भाजपा ने सांसद साध्वी निरंजन ज्योति पर फिर दांव लगाया है। सपा ने प्रत्याशी घोषित नहीं किया है।
जौनपुर : करीब एक लाख निषाद हैं। भाजपा ने कृपाशंकर सिंह को मौका दिया है। सपा ने अभी प्रत्याशी घोषित नहीं किया है।
प्रयागराज : यहां करीब डेढ़ लाख निषाद हैं। यहां से रीता बहुगुणा जोशी सांसद हैं। गठबंधन में यह सीट कांग्रेस के पास है। अभी तक किसी पक्ष ने उम्मीदवार नहीं उतारा है।
फतेहपुर सीकरी : यहां करीब दो लाख निषाद हैं। भाजपा ने सांसद राजकुमार चाहर को दोबारा मौका दिया है, जबकि गठबंधन में यह सीट कांग्रेस के पास है।
(नोट- जातीय आंकड़ा विभिन्न पार्टियों के दावों के मुताबिक)
निषाद समाज की सियासी ताकत
वर्ष 1926 में जब डॉ. भीमराव आंबेडकर बॉम्बे प्रेसीडेंसी से एमएलसी बने थे, उस समय संयुक्त प्रांत से कोर्ट ऑफ अवध के वकील बाबू रामचरणलाल मल्लाह भी एमएलसी चुने गए थे।
- 1952 के आम चुनाव में महात्मा गांधी के शिष्य प्रभुदयाल विद्यार्थी बांसी से पहले विधायक बने।
- 2022 में आठ विधायक चुने गए, इनमें छह भाजपा के और दो सपा के हैं। इस समय भाजपा से राज्यसभा में समाज के दो और लोकसभा में पांच सांसद हैं।
निषाद पार्टी के गठन के बाद समाज को सम्मान मिला। सभी दल इस समुदाय को टिकट देने के लिए विवश हुए। मछुआ कल्याण बोर्ड बनने से समाज को लाभ मिल रहा है। पहली बार सदन में सांविधानिक सुरक्षा का मुद्दा उठा। - डॉ. संजय निषाद, मत्स्य मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष
भाजपा ने निषादों से वादाखिलाफी की। सरकार में शामिल होकर सत्तासुख लेने वालों से सावधान रहना होगा। निषाद मछुआ समुदाय की जातियों को अनुसूचित जाति का दर्जा दिलाने के लिए संघर्ष जारी रखा जाएगा। -चौधरी लौटनराम निषाद, राष्ट्रीय सचिव, राष्ट्रीय निषाद संघ