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ग्राउंड रिपोर्ट: यूपी की ये सीट सुरक्षित... प्रत्याशी असुरक्षित; उम्मीदवारों की राह में बिछे नाराजगी के कांटे

सचिन त्रिपाठी, अमर उजाला, लखनऊ Published by: शाहरुख खान Updated Sat, 18 May 2024 08:08 AM IST

सार

यूपी की इस सीट पर सभी दलों के प्रत्याशी असुरक्षित हैं। भाजपा ने हैट्रिक लगाने के लिए पूरा जोर लगा दिया है। तो सपा सीट पर फिर से परचम फहराने के फेर में हैं। लगातार चार बार दूसरे स्थान पर रही बसपा भी जीत की तलाश में है।
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UP lok Sabha Election 2024 - फोटो : अमर उजाला
राजधानी लखनऊ की ग्रामीण लोकसभा सीट मोहनलालगंज के न केवल समीकरण अलग हैं, मिजाज और अंदाज भी अलग हैं। 35.78 फीसदी दलित आबादी वाली यह सीट 1962 में अस्तित्व में आने के बाद से अब तक अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित है। 
 
इस बार प्रत्याशियों की राह में जगह-जगह नाराजगी के कांटे बिछे हुए हैं। ऐसे में सभी के रणकौशल का इम्तिहान है। बहरहाल, भाजपा हैट्रिक लगाने को बेताब है, तो 1998 से 2009 तक लगातार चार बार जीत का स्वाद चख चुकी सपा पांचवीं जीत के लिए बेकरार है। 


वहीं, लगातार चार बार चौथे स्थान पर रहने वाली बसपा भी खाता खुलने की उम्मीद में पूरा जोर लगा रही है। लगातार दो बार भगवा परचम फहरा चुके केंद्रीय राज्यमंत्री कौशल किशोर को पार्टी ने फिर से मैदान में उतारा है। वे मलिहाबाद सीट से 2002 में निर्दलीय विधायक भी रहे थे।
  • सपा प्रत्याशी आरके चौधरी बसपा के संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे हैं। बसपा सरकार में चार बार मंत्री भी रहे। मोहनलालगंज विधानसभा सीट से भी चौधरी बसपा के टिकट और एक बार भाजपा के समर्थन से निर्दलीय विधायक रह चुके हैं। फैजाबाद में जन्मे चौधरी मोहनलालगंज लोकसभा सीट पर तीन बार किस्मत आजमां चुके हैं। हालांकि तीनों बार उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा। बसपा से राहें जुदा हुईं तो 2019 में कांग्रेस से भाग्य आजमाया। अब सपा से मैदान में हैं।
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UP lok Sabha Election 2024 - फोटो : अमर उजाला
राजधानी लखनऊ की ग्रामीण लोकसभा सीट मोहनलालगंज के न केवल समीकरण अलग हैं, मिजाज और अंदाज भी अलग हैं। 35.78 फीसदी दलित आबादी वाली यह सीट 1962 में अस्तित्व में आने के बाद से अब तक अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित है। 
 
इस बार प्रत्याशियों की राह में जगह-जगह नाराजगी के कांटे बिछे हुए हैं। ऐसे में सभी के रणकौशल का इम्तिहान है। बहरहाल, भाजपा हैट्रिक लगाने को बेताब है, तो 1998 से 2009 तक लगातार चार बार जीत का स्वाद चख चुकी सपा पांचवीं जीत के लिए बेकरार है। 

वहीं, लगातार चार बार चौथे स्थान पर रहने वाली बसपा भी खाता खुलने की उम्मीद में पूरा जोर लगा रही है। लगातार दो बार भगवा परचम फहरा चुके केंद्रीय राज्यमंत्री कौशल किशोर को पार्टी ने फिर से मैदान में उतारा है। वे मलिहाबाद सीट से 2002 में निर्दलीय विधायक भी रहे थे।
  • सपा प्रत्याशी आरके चौधरी बसपा के संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे हैं। बसपा सरकार में चार बार मंत्री भी रहे। मोहनलालगंज विधानसभा सीट से भी चौधरी बसपा के टिकट और एक बार भाजपा के समर्थन से निर्दलीय विधायक रह चुके हैं। फैजाबाद में जन्मे चौधरी मोहनलालगंज लोकसभा सीट पर तीन बार किस्मत आजमां चुके हैं। हालांकि तीनों बार उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा। बसपा से राहें जुदा हुईं तो 2019 में कांग्रेस से भाग्य आजमाया। अब सपा से मैदान में हैं।

  • बसपा प्रत्याशी राजेश कुमार उर्फ मनोज प्रधान मोहनलालगंज क्षेत्र के ही निवासी हैं। ऐसे में मतदाता इन सभी से भली-भांति परिचित हैं। इसी वजह से समर्थन और नाराजगी का भी एक अलग स्तर है।

सवर्ण और यादवों की नाराजगी पैदा कर रही अंतर
भाजपा प्रत्याशी कौशल किशोर को मलिहाबाद विधानसभा क्षेत्र में सवर्णों की नाराजगी झेलनी पड़ रही है। यहां से उनकी पत्नी जयदेवी विधायक हैं। सपा प्रत्याशी आरके चौधरी की क्षेत्र के दलित वोटबैंक में खासी पैठ मानी जाती है। यही वजह है कि भले ही इस बार वे सपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हों, पर यहां यादवों का एक वर्ग उनसे नाराज है।

 

पांचों विधानसभा क्षेत्र के अलग हैं समीकरण और मुद्दे
मोहनलालगंज लोकसभा सीट में लखनऊ की मलिहाबाद, सरोजनीनगर, बीकेटी, मोहनलालगंज और सीतापुर की सिधौली विधानसभा सीट आती है। इन सभी पर भाजपा का कब्जा है। हर विधानसभा क्षेत्र के अपने मुद्दे और समीकरण हैं। सीतापुर का सिधौली विधानसभा क्षेत्र सबसे दूर है।
 

ऐसे में वहां एक बड़े वर्ग में मौजूदा सांसद के प्रति नाराजगी है। मनकापुर गांव निवासी आशीष सिंह, प्रकाश रावत, कमल किशोर और जमील चुनावी चर्चा छिड़ते ही शिकायती लहजे में कहते हैं, चुनाव के दौरान ही सांसद के दर्शन होते हैं। सिधौली, महमूदाबाद और बिस्वां क्षेत्र में ओवरब्रिज नहीं बनने से लोग परेशान हैं।

फलपट्टी में सुविधाएं नहीं होने से नाराजगी
दुनिया भर में आम के लिए मशहूर मलिहाबाद में समीकरण कुछ भी हों, पर म़ुद्दा आम के बगीचे भी हैं। मलिहाबाद कस्बे में मिले शैलेंद्र पांडेय, रमेश कुमार, प्रवीण और शेखावत के मुताबिक क्षेत्र को फलपट्टी का दर्जा है, लेकिन सुविधा के नाम पर कुछ नहीं है। कीटों की बढ़ती संख्या तथा कीटनाशकों की आसमान छूती कीमतों की वजह से लोग आम के पेड़ काटकर खेती करने को मजबूर हैं। वो दिन दूर नहीं, जब यहां गिने-चुने बाग ही बचेंगे।
 

  • आगरा एक्सप्रेसवे के किनारे बसे सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र के माधवपुर और आसपास के क्षेत्रों में प्लाॅटिंग तेजी से चल रही है। लोगों के पास मिले मुआवजे और निजी बिल्डरों को जमीन बेचने से खासा बैंक बैलेंस भी है। वोट देने के लिए यहां मुद्दे से ज्यादा बिरादरी और पार्टी अहम है। 

  • इसी विधानसभा सीट के तहत कानपुर रोड के करीब बसे हिंदनगर निवासी सुरेश कुमार के अनुसार हमें फर्क नहीं पड़ता कि प्रत्याशी कौन है। हम तो मोदी को वोट करेंगे।

रोजगार की दिक्कत
मोहनलालगंज क्षेत्र के निगोहां गांव निवासी आशीष दीक्षित, कृष्ण मोहन बाबूलाल पाल के अनुसार क्षेत्र में शहरीकरण तेजी से हो रहा है। निजी बिल्डरों ने जमीन की कीमतें बढ़ा दी हैं। गांव के ही छात्र आशुतोष के अनुसार क्षेत्र में एक भी सरकारी डिग्री कॉलेज नहीं होना, यहां का बड़ा मुद्दा है। मजदूरी करके जीवन यापन करने वाले संतोष व व्यापारी सूरज के अनुसार रोजगार के लिए अभी भी लोगों को परेशान होना पड़ रहा है।
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