लोकसभा चुनाव में इस बार कुछ ऐसे समीकरण बने कि बाराबंकी की राजनीति में ही उलटफेर हो गया है। पिछले कई चुनावों में सांसद, विधायक, जिला पंचायत अध्यक्ष के पद पर आमने सामने चुनाव लड़ चुके नेता इस चुनाव में एक साथ वोट मांग रहे हैं। सियासत के चिर प्रतिद्वंद्वी एक हो गए हैं। बदले रंग देखकर मतदाता भी खूब चटखारे लेकर इनकी चर्चा कर रहे हैं।
कांग्रेस के दिग्गज नेता व सांसद डॉ. पीएल पुलिया 2009 में कांग्रेस के टिकट पर सांसद बने थे। उन्होंने सपा के रामसागर रावत को हराया था। 2014 में कांग्रेस से पीएल पुनिया चुनाव लड़े तो सामने फिर सपा से रामसागर रावत ही थे। लेकिन यह चुनाव भाजपा की प्रियंका रावत ने जीता।
2019 में तब कांग्रेस ने डॉ. पीएल पुनिया के पुत्र तनुज पुनिया को उम्मीदवार बनाया तो सपा से रामसागर रावत फिर सामने थे। लेकिन चुनाव भाजपा के उपेंद्र रावत ने जीत लिया था। लेकिन अब जब इंडी गठबंधन के तहत एक बार फिर तनुज पुनिया उम्मीदवार बनाए गए हैं तो पिता व पुत्र दोनों के प्रतिद्वंदी रहे सपा नेता रामसागर रावत तनुज पुनिया के लिए वोट मांग रहे हैं।
रामसागर व पुनिया के एक साथ मंच पर आ रहे हैं। इसी प्रकार जैदपुर विधानसभा में 2019 में उपचुनाव हुआ तो सपा से गौरव रावत, कांग्रेस से तनुज पुनिया मैदान में आए। गौरव ने तनुज को हराकर विधायकी जीत ली।