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यूपी: महोबा कांड में फंसे निरीक्षक, 1.80 करोड़ से अधिक संपत्ति मिलने पर मुकदमा दर्ज, वीडियो हुआ था वायरल

Mon, 12 Feb 2024 09:15 AM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

सात सितंबर 2020 को क्रशर कारोबारी इंद्रकांत त्रिपाठी का महोबा के तत्कालीन एसपी मणिलाल पाटीदार पर छह लाख रुपये रिश्वत मांगने का आरोप लगाते हुए वीडियो वायरल हुआ था। 
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महोबा में क्रशर कारोबारी इंद्रकांत त्रिपाठी के परिजनों से बातचीत करते एसआईटी टीम के अधिकारी। - फोटो : MAHOBA
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विस्तार
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 क्रशर कारोबारी इंद्रकांत त्रिपाठी की मौत के बाद शासन के निर्देश पर महोबा में तैनात पुलिसकर्मियों की संपत्ति की जांच में जिले में तैनात रहे निरीक्षक अशोक कुमार सिंह फंस गए हैं। वर्तमान में सीबीसीआईडी गोरखपुर में तैनात निरीक्षक के खिलाफ बीते दिनों भ्रष्टाचार निवारण संगठन (एसीओ) ने महोबा कोतवाली नगर थाने में मुकदमा दर्ज कराने के बाद उसे टेकओवर कर लिया है। एसीओ ने उनके खिलाफ बांदा के एंटी करप्शन थाने में मुकदमा दर्ज किया है।

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बता दें कि सात सितंबर 2020 को क्रशर कारोबारी इंद्रकांत त्रिपाठी का महोबा के तत्कालीन एसपी मणिलाल पाटीदार पर छह लाख रुपये रिश्वत मांगने का आरोप लगाते हुए वीडियो वायरल हुआ था। इसके बाद क्रशर कारोबारी की गोली लगने से इलाज के दौरान मौत हो गयी थी। इस घटना पर सख्त रुख अपनाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित एसआईटी ने तत्कालीन एसपी मणिलाल पाटीदार, एसओ कबरई देवेंद्र शुक्ला, सिपाही अरुण यादव व्यापारी सुरेश सोनी आदि के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। वहीं दूसरी ओर शासन के निर्देश पर वर्ष 2020 में महोबा में तैनात रहे सभी निरीक्षकों व उप निरीक्षकों की संपत्तियों की जांच भी शुरू कर दी गयी थी। इनमें लखनऊ स्थित विकास नगर के फार्च्यून अपार्टमेंट निवासी निरीक्षक अशोक कुमार सिंह (मूल पता फतेहपुर, ग्राम सगरा) भी शामिल थे।

1.80 करोड़ की अधिक मिली संपत्तियां
5 अक्टूबर 2020 को शासन के निर्देश पर एसीओ सहारनपुर यूनिट के निरीक्षक संजय सिंह ने जांच की, जिसमें सामने आया कि अशोक कुमार सिंह ने अपने सभी वैध स्रोतों से कुल 1,43,70,091 रुपये की आय अर्जित की। वहीं कुल 3,23,76,148 रुपये चल-अचल संपत्तियों को अर्जित करने में खर्च किए। इस तरह उन्होंने अपनी कुल आय से 1,80,06,057 रुपये अधिक व्यय किए। इस संबंध में जबाव-तलब करने पर वह संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। जिसके बाद शासन के निर्देश पर उनके निर्देश पर मुकदमा दर्ज किया गया है।

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