देवा की होली ने पेश की सौहार्द की मिसाल।
- फोटो : amar ujala
देवा कस्बे में यह परंपरा सदियों पुरानी है। संत हाजी वारिस अली शाह ने अपने जीवनकाल में 'जो रब है वही राम है' का संदेश दिया था, जो आज भी यहां की आबोहवा में बसा हुआ है। उनकी दरगाह पर हिंदू-मुस्लिम समेत सभी धर्मों के लोग सिर झुकाने आते हैं।
होली के मौके पर यह स्थान और भी खास बन जाता है, जब दरगाह परिसर में श्रद्धालु और जायरीन चाहे वे हिंदू हों या मुस्लिम एक साथ रंगों में सराबोर हो जाते हैं। इस पल को कैमरे में कैद करने के लिए दूर-दूर से लोग यहां पहुंचते हैं।
देवा की होली ने पेश की सौहार्द की मिसाल।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर एक-दूसरे के धर्म और आस्थाओं का सम्मान किया जाए, तो किसी तरह का टकराव संभव ही नहीं है। दरगाह परिसर में होली के दौरान यह दृश्य साफ देखा जा सकता है, जहां श्रद्धालु एक-दूसरे पर गुलाल उड़ाते हैं, लेकिन नमाजियों के सम्मान का पूरा ध्यान रखते हैं।
इस ऐतिहासिक दरगाह से निकला यह संदेश पूरे देश को जोड़ने और समाज में सौहार्द्र बनाए रखने की सीख दे रहा है। देवा की यह सरजमी इस होली पर पूरे प्रदेश के लिए नजीर बनकर सामने आई है।