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यूपी: अनुकंपा नियुक्ति को लेकर हाईकोर्ट का फैसला- कर्मचारी की मृत्यु तिथि से तय होगी विधवा पुत्रवधू की पात्रता

Mon, 27 Apr 2026 08:44 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

Lucknow High Court: अनुकंपा नियुक्ति को लेकर  हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने विधवा पुत्रवधू की पात्रता निर्धारण को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है। 
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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ का फैसला।
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विस्तार
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हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि अनुकंपा नियुक्ति के लिए “विधवा पुत्रवधू” की पात्रता का निर्धारण सरकारी कर्मचारी की मृत्यु की तिथि के संदर्भ में किया जाना अनिवार्य है। कोर्ट ने आदेश दिया कि जो व्यक्ति कर्मचारी की मृत्यु के समय “पारिवारिक इकाई” का सदस्य नहीं था, वह विवाह या विधवा होने जैसी बाद की घटनाओं के आधार पर पात्रता का दावा नहीं कर सकता। न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति अबधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने यह फैसला दीपिका तिवारी की विशेष अपील को खारिज करके दिया।

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इस मामले का मुख्य बिंदु यह था कि क्या एक महिला, जिसने सरकारी कर्मचारी की मृत्यु के लगभग दो साल बाद उसके बेटे से विवाह किया और बाद में विधवा हो गई, अनुकंपा नियुक्ति की हकदार हो सकती है। कोर्ट को उत्तर प्रदेश इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम, 1921 के विनियम 103 से 107 की व्याख्या करनी थी ताकि यह तय किया जा सके कि क्या “विधवा पुत्रवधू” का दर्जा कर्मचारी के निधन के समय अस्तित्व में होना चाहिए।

दरअसल, संगीता बाजपेयी जो लखनऊ के नारी शिक्षा निकेतन इंटर कॉलेज में सहायक शिक्षिका थीं, जिनका 23 अप्रैल 2021 को सेवाकाल के दौरान निधन हो गया। उनके परिवार में उनके पति और एक बेरोजगार बेटा, निखिल बाजपेयी थे। बेटे का अनुकंपा नियुक्ति का आवेदन 10 अप्रैल 2023 को इस आधार पर खारिज कर दिया गया था कि उसके पिता पेंशनभोगी थे।
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इसी बीच, निखिल बाजपेयी ने 15 फरवरी 2023 को अपीलकर्ता दीपिका तिवारी से विवाह कर लिया। विवाह के कुछ समय बाद ही 13 मई 2023 को निखिल का निधन हो गया। पति की मृत्यु के बाद, अपीलकर्ता दीपिका ने संगीता बाजपेयी की “विधवा पुत्रवधू” के रूप में अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया। हालांकि, शुरुआत में उन्हें नियुक्ति का आदेश मिला, लेकिन शिक्षण संस्थान की आपत्तियों के बाद उसे रद्द कर दिया गया। हाईकोर्ट की एकल पीठ द्वारा उनकी याचिका खारिज होने के बाद यह विशेष अपील दायर की गई थी।

हाईकोर्ट ने एकल पीठ के निर्णय को सही ठहराते हुए विशेष अपील को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अपीलकर्ता को नियुक्ति का कोई अधिकार नहीं है क्योंकि संगीता बाजपेयी की मृत्यु के समय वह परिवार की पुत्रवधू भी नहीं थी।

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