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यूपी: डेंगू की रोकथाम मामले में हाईकोर्ट सख्त, कोर्ट ने पूछा- नगर निगम बताए कि अब तक रोकथाम के लिए क्या किया?

Thu, 29 Aug 2024 06:23 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

High Court strict: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीड ने राजधानी में डेंगू समेत अन्य मच्छर जनित बीमारियों की रोकथाम मामले में सख्त रुख अपनाया है।
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यूपी में डेंगू का प्रकोप। - फोटो : amarujala
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विस्तार
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हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने राजधानी में डेंगू समेत अन्य मच्छर जनित बीमारियों की रोकथाम मामले में सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने नगर निगम से पूछा है कि पहले दिए गए आदेशों के तहत क्या कारवाई की गई। इसके लिए नगर निगम को इसका जवाबी हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया कि डेंगू समेत अन्य मच्छर जनित बीमारियों की रोकथाम को क्या उपाय किए गए हैं। कोर्ट ने इसके लिए शहर के 110 वार्डों में फॉगिंग, कूड़े कचरे का निस्तारण, नालियों की सफाई समेत सड़कों पर भरे पानी को हटाने को लेकर की गई कारवाई का ब्योरा भी 9 सितंबर को तलब किया है।

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यह आदेश न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की खंडपीठ ने फरीद अली सिद्दीकी की वर्ष 2014 में दाखिल जनहित याचिका पर दिया। इस मामले में और भी याचिकाएं दाखिल हुईं। इनमें शहर में लोगों को डेंगू और अन्य मच्छर जनित बीमारियों के प्रकोप से बचाने को इनकी रोकथाम के उपाय करने का आग्रह किया गया है। याची का कहना था कि डेंगू समेत अन्य मच्छर जनित बीमारियां शहर में तेजी से फैल रही हैं। काफी लोग इनकी चपेट में आ रहे हैं। याची ने इनकी रोकथाम को निर्देश जारी करने का आग्रह किया।

इस मामले में पहले कोर्ट ने लखनऊ के मंडलायुक्त की अध्यक्षता में समिति बनाने का आदेश दिया था। समिति को निर्देश दिया गया था कि संबंधित अफसर शहर के विभिन्न इलाकों में जाकर मुआयना करें और इसकी पुष्टि करें कि इन बीमारियों से निपटने को वे पर्याप्त कदम उठा रहे हैं। कोर्ट ने समिति से सुझाव भी मांगे थे कि न सिर्फ वर्तमान सीजन में बल्कि आगे भी इन बीमारियों को रोकने के प्रभावी उपायों का खाका तैयार करें। जिससे अगले वर्षों में बीमारियां शुरू होने से पहले ही इन्हें खत्म किया जा सके।
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कोर्ट ने इसकी समय- समय पर रिपोर्ट भी पेश करने को कहा था कि इसके लिए क्या प्रयास हो रहे हैं और इनका परिणाम क्या है? पहले राज्य के संबंधित अफसरों की तरफ से समुचित जवाब न दाखिल किए जाने पर कोर्ट ने नाखुशी व्यक्त की थी। जिसके बाद मामले की पिछली सुनवाई के समय कोर्ट के आदेश पर राज्य सरकार की तरफ से जवाब दाखिल किया गया था।

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