सरकार के तमाम दावे के बावजूद सूबे में अवैध खनन नहीं रुक पा रहा है।
जिलाधिकारी और एसएसपी ही अवैध खनन रोकने के सरकारी निर्देशों का पालन नहीं करवा पा रहे हैं।
इससे न सिर्फ कई जगह कानून-व्यवस्था की चुनौती खड़ी हो जाती है बल्कि सरकार को राजस्व का भी नुकसान उठाना पड़ता है।
शासन ने एक बार फिर अफसरों के इस रवैये पर नाराजगी जताते हुए अवैध खनन रोकने के निर्देशों का कड़ाई से पालन कराने को कहा है।
जानकारों का कहना है कि दबंग सियासी नेताओं के संरक्षण में अवैध खनन होने की वजह से स्थानीय प्रशासन ठीक से अंकुश नहीं लगा पा रहा है।
कई स्थानों पर यह बात सामने आई है कि अवैध खनन के खिलाफ मुहिम छेड़ने वाले अफसर का कुछ दिन बाद ही तबादला कर दिया गया।
इसमें एसडीएम व डीएम से लेकर कमिश्नर तक के तबादले चर्चा का विषय बनते रहे हैं। जबकि सरकार इस तरह के आरोपों को नकारती रही है।
शायद खनन माफियाओं के सीधे सत्ता और शासन तक पकड़ होने की वजह ही है कि फील्ड के अधिकारी इस ओर से आंखें मूंदे रहते हैं।
शासन भी सब कुछ जानने के बावजूद केवल आदेश जारी कर चुप्पी साधे रहता है।
भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग के नए प्रमुख सचिव डॉ. गुरदीप सिंह ने शासन के फीडबैक की जानकारी देते हुए कहा कि जिलाधिकारी, एसएसपी व एसपी अवैध खनन रोकने के तमाम निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन नहीं कर पा रहे हैं।
इस संबंध में लिखे अपने पत्र में उन्होंने अवैध खनन में लिप्त पाए गए लोगों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कराने को कहा है।
जिला खनन अधिकारी अवैध खनन रोकने के लिए डीएम से पुलिस बल लेकर नियमित निरीक्षण करेंगे। उन्हें हर सप्ताह की गई कार्रवाई की रिपोर्ट निदेशक के जरिये शासन को भेजनी होगी।
निदेशक भूतत्व एवं खनिकर्म निदेशालय स्तर से कम से कम पांच उड़नदस्ते बनाएंगे। ये उड़नदस्ते खनन बहुल क्षेत्रों में जाकर देखेंगे कि शासन के निर्देशों का पालन हो रहा है या नहीं।
उड़नदस्ते खनिज ले जा रहे ट्रकों को रोककर यह भी देखेंगे कि रवन्ना के अनुसार खनिज की मात्रा ज्यादा तो नहीं है। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि रवन्ना मूल है अथवा डुप्लीकेट।