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यूपी: कार्यस्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सरकार सख्त, देर रात तक काम नहीं कराने के दिए निर्देश

Thu, 22 Aug 2024 07:50 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

Safety of women in UP: कोलकाता कांड के बाद कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा को लेकर यूपी सरकार सख्त हुई है। इस बारे में  सभी मंडलायुक्तों, पुलिस कमिश्नर, डीएम, जिलों के कप्तानों को निर्देश दिए गए हैं। 
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महिलाओं की टाइमिंग को लेकर निर्देश जारी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कोलकाता कांड के बाद प्रदेश में कामकाजी महिलाओं की कार्यस्थल पर सुरक्षा को लेकर सरकार ने सख्ती दिखाई है। इसके लिए गृह विभाग की ओर से महिलाओं की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने को लेकर मार्गदर्शक सिद्धांत और दिशा-निर्देश जारी किया है। अपर मुख्य सचिव गृह दीपक कुमार की ओर से सभी मंडलायुक्तों, पुलिस कमिश्नर, डीएम, जिलों के कप्तान, सीएमओ और विभागाध्यक्षों को भेजे गए निर्देश में कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा के साथ ही रात में उनके आवागमन वाले रास्ते पर भी नजर रखने को कहा गया है।

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अपर मुख्य सचिव ने प्रभावी आपातकालीन प्रक्रिया प्रोटोकॉल, सुरक्षा के मजबूत उपाय, सुरक्षा ऑडिट, विधिक जानकारी, महिला हेल्पलाइन और सहायता सेवाओं की जानकारी देने के साथ ही महिलाओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देने की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। आदेश के मुताबिक कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के अलावा उनके स्वास्थ्य और गरिमा की सुरक्षा के कई नियम राज्य में प्रभावी हैं। गृह विभाग ने यह सुनिश्चित कराने को कहा है कि रात्रि में महिलाओं को निर्धारित समयावधि से अधिक काम न करना पड़े। नियोक्ता द्वारा सुरक्षित परिवहन की व्यवस्था की जाए। 

रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक आकस्मिकता की स्थिति में महिलाओं की मांग के अनुरूप यूपी 112 द्वारा प्रदान की जाने वाली एस्कॉर्ट सुविधा का प्रचार-प्रसार किया जाए। परिवहन विभाग की बसों तथा प्राइवेट टैक्सी के लिए ऐसे ड्रॉप प्वाइंट चिन्हित करें, जहां पर्याप्त प्रकाश और सीसीटीवी की व्यवस्था हो। रात में महिलाओं के आवागमन के दृष्टिगत सभी कार्यस्थल जैसे कॉल सेंटर, स्वास्थ्य संस्थानों, कार्यालय, व्यवसायिक प्रतिष्ठान, सिनेमा हॉल, मल्टीप्लेक्स, होटल, रेस्टोरेंट, रेलवे एवं बस स्टेशन आदि की थानावार सूची बना ली जाए। सूची में महिलाओं का विवरण भी दर्ज किया जाए। साथ ही रात्रि हॉट-स्पाट्स चिन्हित कर लिए जाएं, जहां पुलिस नियमित गश्त करे। कार्यस्थल के स्वामी, मुख्य प्रबंधक, सुरक्षा गार्डों की नियमित बीफ्रिंग करके उन्हें सतर्क और जागरूक किया जाए।
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कार्यस्थल की निगरानी भी
निर्देशों में कार्यस्थल पर सीसीटीवी, एक्सेस कंट्रोल सिस्टम आदि सुरक्षा उपाय करने को भी कहा गया है। साथ ही सभी कर्मियों के पहचान पत्र जुटाने तथा आपात स्थिति में संपर्क के लिए चौबीस घंटे एक अधिकारी नामित करने का निर्देश दिया गया है। महिलाओं के लिए कार्यस्थल के पास अलग और सुरक्षित रेस्ट रूम और प्रसाधन कक्ष की व्यवस्था अनिवार्य करने तथा कार्यस्थल पर आगंतुकों की सख्त निगरानी करने को कहा गया है।

यौन उत्पीड़न को लेकर सख्त कानून
कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम 2013 को सख्ती से लागू करने को कहा गया है। इसके तहत शारीरिक संपर्क और अग्रसरण, यौन संपर्क के लिए मांग अथवा अनुरोध, लैंगिक रूप से भद्दी टिप्पणी, अश्लील साहित्य दिखाना, अन्य अवांछनीय शारीरिक, मौखिक या अमौखिक आचरण करना शामिल है। इस अधिनियम के तहत महिलाओं की शिकायतों के समाधान के लिए एक आंतरिक शिकायत समिति की स्थापना करना अनिवार्य है।
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ये कानून भी प्रभावी
- फैक्ट्री अधिनियम 1948
- उप्र चिकित्सा परिचर्या सेवाकर्मी और चिकित्सा परिचर्या सेवा संस्था (हिंसा और संपत्ति की क्षति का निवारण) अधिनियम 2013
- महामारी संशोधन अधिनियम 2020
- गर्भावस्था का चिकित्सीय समापन अधिनियम 1971

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