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UP Cabinet Decision : एनसीआर के 2.40 लाख फ्लैट आवंटियों की रजिस्ट्री का रास्ता साफ, कोई पेनाल्टी नहीं

Wed, 20 Dec 2023 06:17 AM IST
ishwar ashish अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

UP Cabinet Meeting Today Decision: कोरोना काल में श्रम कानूनों में छूट का अध्यादेश वापस, ब्वायलर एक्ट का संशोधन भी वापस, होगी जेल। एमएसएमई विभाग में प्रशासनिक कामकाज के लिए वाहनों की खरीद की निर्धारित सीमा में 40 फीसदी तक वृद्धि की गई है।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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देशभर के लाखों घर खरीदने वालों और बिल्डरों की समस्याओं का हल निकालने के लिए गठित अमिताभ कांत समिति की रिपोर्ट को प्रदेश में भी लागू होगी। मंगलवार को कैबिनेट में इससे संबंधित प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इसी के साथ नोएडा-एनसीआर के 2.40 लाख फ्लैट आवंटियों की न केवल रजिस्ट्री होगी बल्कि बिल्डर की लापरवाही की वजह से प्राधिकरणों द्वारा लगाई गई पेनाल्टी भी माफ होगी। इसके अलावा वाजिब कारणों से प्रोजेक्ट में होने वाली देरी के दंश से बिल्डरों को भी कुछ राहत दी गई है। इस फैसले से केवल यूपी के ही लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपये के रीयल इस्टेट प्रोजेक्ट्स की राह की बाधाएं खत्म होंगी।

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वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि तमाम कारणों की वजह से अधूरे रियल इस्टेट प्रोजेक्ट्स की वजह से लाखों घर खरीदार वर्षों से भटक रहे हैं। उनकी समस्याओं का समाधान निकालने के लिए केंद्र ने नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया था। समिति ने इस वर्ष 31 मार्च को अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी। इस रिपोर्ट का सबसेे ज्यादा असर यूपी पर पड़ रहा था क्योंकि इंडियन बैैंक एसोसिएशन की रिपोर्ट के मुताबिक देशभर के 4.12 लाख अटके आवास में से 2.40 लाख घर केवल नोएडा एनसीआर में स्थित हैं। इनमें से अधिकांश आवास बिल्डरों की खस्ता हालत की वजह से पूरे नहीं हो पा रहे हैं। समिति की संस्तुतियों को कैबिनेट मंजूरी के बाद एक तरफ घर खरीदारों के हितों की रक्षा होगी तो दूसरी तरफ रुकी परियोजनाओं को समय से तैयार कर खरीदारों को समय से फ्लैट मिलेंगे। उन्होंने कहा कि सिफारिशों की मंजूरी से क्षेत्र के आर्थिक विकास को गति मिलेगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

नोएडा-ग्रेटर नोएडा के घर खरीदारों के लिए बड़ी खुशखबरी
नोएडा और ग्रेटर नोएडा में कई आवासीय प्रोजेक्ट ऐसे हैं जो पूरे हो चुके हैं और खरीदार रह रहे हैं लेकिन उनके घर की रजिस्ट्री नहीं हो रही है। इसकी वजह बिल्डरों का नोएडा और ग्रेटर नोएडा अथारिटी पर बकाया अरबों रुपये के विभिन्न शुल्क और पेनाल्टी है। अमिताभ कांत समिति ने सिफारिश की है कि बिल्डर के ऊपर बकाये की सजा खरीदारों को कतई न दी जाए। ऐसे परियोजनाओं में घरों की रजिस्ट्री तत्काल शुरू की जाए। जिन बिल्डरों के ऊपर बकाया है, उनसे वसूलने के लिए कठोर कदम उठाए जाएं। जिन प्रोजेक्ट में आवंटियों ने पूरा भुगतान नहीं किया है, उनसे बिल्डर के बजाय रेरा वसूली करेगा। इस रकम से अधूरी परियोजना को पूरा किया जाएगा। जिन इमारतों का ढांचा तैयार है लेकिन इंटीरियर अधूरा है, उन मामलों में फ्लैट आवंटी को खुद इंटीरियर कराने का विकल्प दिया जाएगा। इसके एवज में बिल्डर पर बकाया धन का भुगतान आवंटी नहीं करेगा।
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बिल्डरों को चार साल की राहत, मिलेगा पुनर्वास पैकेज
समिति ने रुकी आवासीय परियोजनाओं के लिए विशेष पुनर्वास पैकेज की सिफारिश की है। पूरी हो सकने वाली परियोजनाओं से जुड़े बिल्डरों पर चार साल की पेनाल्टी और ब्याज नोएडा विकास प्राधिकरण और ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण से माफ करने की संस्तुति की गई है। चार साल को ‘जीरो पीरियड’ घोषित किया जाएगा। दो साल का पहला फेज ओखला बर्ड सेंचुरी का मामला अदालत में होने की वजह से 14 अगस्त 2013 से 19 अगस्त 2015 तक का है। अगले दो साल का फेज कोरोना काल का है, एक अप्रैल 2020 से 31 मार्च 2022 तक है। पुनर्वास पैकेज के दायरे में आने वाले प्रोजेक्ट के घर खरीदारों किसी तरह की अतिरिक्त लागत, पेनाल्टी या ब्याज नहीं वसूला जाएगा।

बिल्डरों को ये राहतें भी
-अधूरे प्रोजेक्ट पूरे करने को अतिरिक्त फंड जुटाने के लिए बिल्डर अपने साथ दूसरे बिल्डर को भी जोड़ सकेगा। इसके लिए प्राधिकरण से मंजूरी लेना अनिवार्य नहीं होगा।
-बिल्डर को अपनी बची या खाली जमीन सरेंडर करने की छूट होगी। सरेंडर करने के साथ ही जमीन पर बकाया और पेनाल्टी माफ की जाएगी।
-समिति के मुताबिक बिल्डर को अपनी परियोजना के विस्तार मंजूरी दी जाएगी। मंजूरी के लिए बकाया रकम के पूरे भुगतान की जरूरत नहीं होगी।
-वर्ष 2018 से पहले शुरु हो चुके व दो साल से ज्यादा की देरी वाली परियोजना पूरा करने की जिम्मेदारी रेरा उठाएगा।
-एमएसएएमई की तरह अधूरे हाउसिंग प्रोजेक्ट के लिए कम ब्याज पर बिल्डर को लोन की सिफारिश भी की है। इस लोन की गारंटी केंद्र सरकार लेगी।
-समिति ने कहा कि रियल इस्टेट परियोजनाओं के मामले एनसीएलटी और दिवालिया एक्ट में जाने का विकल्प बिल्कुल अंतिम रखा जाए।


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कैबिनेट बैठक में इन प्रस्तावों पर लगी मुहर:
-  संजय गांधी स्नाकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान लखनऊ में एडवांस्ड प्रिडिक केंद्र की स्थापना के लिए प्रस्ताव को मंजूरी।
- उत्तर प्रदेश औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति 2022 के अंतर्गत प्रदेश में मेगा श्रेणी के औद्योगिक उपक्रमों हेतु विशेष सुविधाएं एवं रियायती अनुमय कराए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई।
-  जिला शाहजहांपुर में नवीन जिला कारागार जिसमें बंदी क्षमता 2120 के निर्माण कार्य के लिए संपूर्ण प्रयोजन एवं लाख की लागत पर प्रशासकीय स्वीकृति के संबंध में स्वीकृति दे दी गई है।
- उत्तर प्रदेश वन विभाग अवर अधीनस्थ (वनरक्षक और वन्य जीव रक्षक) सेवा नियमावली 2015 में संशोधन  को मंजूरी।
- बैठक में अधिवक्ता कल्याण निधि को बढ़ाकर 500 करोड़ किए जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति।
- सहारनपुर विकास प्राधिकरण के विकास क्षेत्र में 33 राजस्व ग्रामों को सम्मिलित किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है।

आगरा में बनेगा अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र का रीजनल सेंटर

आगरा के राजकीय प्रक्षेत्र सींगना में पेरू के अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र का रीजनल सेंटर बनेगा। यहां आलू के उत्पादन और गुणवत्ता बढ़ाने के लिए शोध होगा। सेंटर के लिए प्रक्षेत्र की 10 हेक्टेयर जमीन 99 वर्ष के लीज पर दी जाएगी। उद्यान विभाग और राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड गुरुग्राम हरियाणा के बीच होने वाली लीज डीड पर देय 37.50 लाख के स्टांप शुल्क और 7.50 लाख के निबंधन शुल्क में छूट दी जाएगी। इस प्रस्ताव को मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में मंजूरी दी गई।

रीजनल सेंटर के लिए सींगना स्थित उद्यान विभाग की 138.50 हेक्टेयर में से करीब 10 हेक्टेयर जमीन कृषि एवं किसान कल्याण, उद्यान प्रभाग के नियंत्रणाधीन स्वशासी निकाय राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड गुरुग्राम हरियाणा को दी जाएगी। इस सेंटर के बनने से न सिर्फ आलू के दुर्लभ किस्म के बीज मिल सकेंगे, बल्कि देश के बाहर भी आलू निर्यात करने का रास्ता आसान होगा। इससे किसानों को उपज का अच्छा दाम मिलेगा। यूपी में करीब 8 लाख हेक्टेयर में हर साल लगभग 160 लाख मीट्रिक टन आलू पैदा होता है।

226 गांवों में मोबाइल टावर के लिए मुफ्त में जमीन देगी सरकार

मोबाइल कनेक्टिविटी से वंचित गांवों में फोर जी मोबाइल सेवाएं देने के लिए सरकार तेजी से काम कर रही है। इसके लिए बीएसएनएल को टावर लगाने के लिए मुफ्त में जमीन दी जाएगी। कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।नेशनल ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क के अंतर्गत प्रदेश में ब्राडबैंड कनेक्टिविटी के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर ऑप्टिकल फाइबर केबल (ओएफसी) डाली जाएगी। इसके लिए केंद्र ने स्पेशल परपज व्हैकिल (एसपीवी) के रूप में भारत ब्रांडबैंड नेटवर्क लिमिटेड को चुना है। विभिन्न जिलों के 361 गांवों के 226 स्थानों पर नए मोबाइल टावर लगाने के लिए ग्राम सभा 200 वर्गमीटर जमीन बीएसएनएल को मुफ्त में देगी। इसके अतिरिक्त बीएसएनएल ने वन भूमि के प्रीमियम और किराये के भुगतान से छूट मांगी थी, जिसे मंत्रिपरिषद ने मंजूरी दे दी।

अधिवक्ता कल्याण निधि अब 500 करोड़ रुपये

प्रदेश सरकार की कैबिनेट बैठक में अधिवक्ता कल्याण निधि (कार्पस फंड) को 200 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 500 करोड़ रुपये करने की मंजूरी दी है। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि प्रदेश में अधिवक्ताओं की मृत्यु के बाद उनके आश्रितों को पांच लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी जाती है। प्रदेश सरकार ने अपने संकल्प पत्र की घोषणा के तहत अधिवक्ताओं की मृत्यु पर उनके परिजन को मिलने वाली सहायता राशि की आयु सीमा को भी बढ़ाकर 70 वर्ष किया है। उन्होंने बताया कि 500 करोड़ रुपये के कापर्स फंड के ब्याज से ही सहायता राशि दी जाएगी।

विधानमंडल सत्र का औपचारिक सत्रावसान
कैबिनेट की मंगलवार को हुई बैठक में विधानसभा और विधान परिषद के शीतकालीन सत्र के सत्रावसान के प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया गया। प्रस्ताव में कहा गया था कि वर्तमान में विधानमंडल से कोई कार्य कराया जाना शेष नहीं है। इसलिए सत्रावसान कराने का निर्णय लिया गया है।

हरदुआगंज तापीय परियोजना की बढ़ी लागत को मंजूरी
हरदुआगंज की 660 मेगावाट की तापीय परियोजना की लागत बढ़ गई है। अब इसकी पुनरीक्षित लागत 6352.14 करोड़ रुपया हो गई है। मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में इसे मंजूरी दी गई है। हरदुआगंज तापीय परियोजना पहले अनुमोदित लागत 6011.83 करोड़ थी। अब इसमें 273.15 करोड़ की ब्याज की वृद्धि, स्टार्ट ऑफ फ्यूल पावर एनर्जी में 62.66 करोड़ की वृद्धि एवं एफजीडी सिस्टम के लिए लाइमस्टोन एवं अमोनिया की लागत से 4.50 करोड़ की वृद्धि हो गई है। इस तरह कुल 340.31 करोड़ की वृद्धि हुई है। ऐसे में परियोजना की तृतीय पुनरीक्षित लागत 6352.14 करोड़ रुपये हो गई है। इस परियोजना की कुल लागत का 70 फीसदी विस्तीय संस्थानों से स्वीकृत ऋण द्वारा और 30 फीसदी भाग शासकीय पूंजी द्वारा पोषित किया जा चुका है।

पुरानी कारों से एमएसएमई विभाग को मिलेगी निजात, 40 फीसदी तक बढ़ा बजट

एमएसएमई विभाग में प्रशासनिक कामकाज के लिए वाहनों की खरीद की निर्धारित सीमा में 40 फीसदी तक वृद्धि की गई है। कैबिनेट ने इस संबंध में पेश प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। एमएसएमई मंत्री राकेश सचान ने बताया कि सरकारी विभाग में वाहनों की खरीद जेम पोर्टल से होती है। 22 मई 2015 को बड़ी गाड़ियों की खरीद को लेकर शासनादेश जारी किया गया था। उन्होंने बताया कि सरकारी गाड़ियों की खरीद में रोड टैक्स और राज्य कर नहीं लगता है। इस वजह से एक-एक वाहन की खरीद में अच्छी बचत हो जाती है।

वर्तमान में मंडलायुक्त, प्रमुख सचिव और सचिव स्तर के अधिकारियों के लिए 14 लाख रुपये के वाहन खरीद का नियम था। उनसे छोटे अधिकारियों के लिए 8 लाख रुपये के वाहन खरीदने का नियम था। वाहनों की कीमत काफी बढ़ जाने से खरीद नहीं हो पा रही थी। इस पर बड़े अधिकारियों के लिए वाहन खरीद की सीमा 14 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये करने का प्रस्ताव दिया गया था। वहीं 8 लाख को 12 लाख रुपये का प्रस्ताव कैबिनेट में पेश किया गया। जिसे कैबिनेट में मंजूरी मिल गई।

सहारनपुर विकास प्राधिकरण के सीमा में शामिल होंगे 33 गांव

प्रदेश सरकार ने सहारनपुर शहर के सुनियोजित विकास को गति देने के लिए और नागरिकों की आवासीय जरूरतों को पूरी करने के लिए सहारनपुर विकास प्राधिकरण (एसएडी) का सीमा विस्तार करने का फैसला किया है। इससे संबंधित आवास विभाग के प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। प्रस्ताव के मुताबिक एसएडी की सीमा में 33 नए ग्राम पंचायतों को शामिल किया जाएगा । इस प्रकार एसएडी में अब कुल गांवों की संख्या 135 हो जाएगी।

प्रस्ताव के मुताबिक सदर तहसील के 18 राजस्व ग्रामों, तहसील नकुड़ के 8 राजस्व ग्रामों, तहसील रामपुर मनिहारन के 05 राजस्व ग्रामों के अलावा पूर्व की अधिसूचना में छूट गए सदर तहसील सदर के ग्राम-उग्राहू अहतमल और नकुड़ तहसील के ग्राम मिर्जापुर ( कुल 33 गांवों ) को विकास प्राधिकरण की सीमा में शामिलि कया गया है।

दरअसल उत्तराखंड की सीमा से सटे होने और बड़ा शहर होने की वजह से यहां की आबादी तेजी से बढ़ रही है। साथ ही शहर से जुड़े प्रमुख मार्गों के आसपास व्यावसायिक और औद्योगिक गतिविधियां भी बढ़ने लगी है। इसे देखते हुए सहारनपुर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष ने डीएम के माध्यम से प्राधिकरण के सीमा विस्तार का प्रस्ताव शासन को भेजा था । विस्तार से शहरे के बाहरी क्षेत्र में सुनियोजित तरीक से आवासीय सुविधाओं के साथ ही व्यावसायिक व औद्योगिक विकास को गति मिल सकेगी।

शीतल पेय बनाने वाली कंपनी वरुण बेवेरेज को 81.5 करोड़ की सब्सिडी की मंजूरी

कार्बोनेटेड सॉफ्ट ड्रिंक, गैर-कार्बोनेटेड सॉफ्ट ड्रिंक, एनर्जी ड्रिंक, स्पोर्ट्स ड्रिंक और पैकेज्ड पेयजल आदि बनाने वाली कंपनी वरुण बेवेरेजेस की चार इकाइयों को स्टेट जीएसटी सेे छूट दी गई है। उत्तर प्रदेश औद्योगिक निवेश और रोजगार प्रोत्साहन नीति-2022 के अंतर्गत दी गई इस छूट के प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी मिल गई।

उत्तर प्रदेश औद्योगिक निवेश और रोजगार प्रोत्साहन नीति-2022 के तहत प्रदेश में मेगा श्रेणी की औद्योगिक इकाइयों को विशेष सुविधाओं व रियायतों को लेकर मुख्य सचिव ने अप्रैल में बैठक बुलाई थी। 29 सितंबर को उच्च स्तरीय प्राधिकृत समिति की दूसरी बैठक में वरुण बेवेरेजेस को लेकर संस्तुति की गई। बैठक में कंपनी की चार औद्योगिक इकाइयों को लेटर आफ कम्फर्ट (एलओसी) जारी करने का फैसला हुआ। इसमें अमेठी परियोजना के लिए 713.75 करोड़, प्रयागराज परियोजना के लिए 1019.87 करोड़, गोरखपुर परियोजना के लिए 1040.24 करोड़ और चित्रकूट परियोजना के लिए 473.75 करोड़ रुपये के निवेश पर एलओसी दी गई। इन चारों परियोजनाओं में कंपनी ने सब्सिडी विकल्पों में से शुद्ध एसजीएसटी रिफंड का विकल्प चुना। इससे कंपनी को करीब 81.5 करोड़ रुपये की सब्सिडी एसजीएसटी रिफंड केे रूप में मिलेगी।

विशेष मामले में न्यायिक अफसरों की पेंशन बढ़ेगी

जिन न्यायिक अधिकारियों के रिटायरमेंट के अगले दिन वेतन वृद्धि देय होगी, उनके पेेंशन की गणना रिटायर होने के अगले दिन होने वाली वेतन वृद्धि को जोड़कर की जाएगी। इस प्रस्ताव को मंत्रिपरिषद ने मंजूरी दे दी है। न्यायिक अफसरों के मामले में रिटायरमेंट तारीख के ठीक अगले दिन वेतनवृद्धि के कई केस आ रहे थे। अब इस तरह के मामले में अधिकारियों को बढ़े वेतन के आधार पर पेंशन मिलेगी। ये वेतनवृद्धि केवल पेंशन के उद्देश्य के लिए होगी जो अधिकतम 2.24 लाख रुपये होगी। इस प्रस्ताव को 19 मई को दिए गए सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर स्वीकार किया गया है।
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कोरोना काल में श्रम कानूनों में छूट का अध्यादेश वापस, ब्वायलर एक्ट का संशोधन भी वापस, होगी जेल

कोरोना काल में उद्यमियों को राहत देने के लिए श्रम कानूनों में कुछ छूट दी गई थी। इस संबंध में मई 2020 में उत्तर प्रदेश श्रम विधियों से अस्थायी छूट अध्यादेश 2020 को लागू किया गया था। निवेश प्रोत्साहन के उद्देश्य से ब्वायलर्स अधिनियम 1923 में जेल का प्रावधान खत्म करने के लिए संशोधन का प्रस्ताव भी वापस ले लिया गया है।

अध्यादेश न्यूनतम वेतन गारंटी अंतर-राज्य और अनुबंध मजदूरों के लिए कवरेज सहित कई सामाजिक सुरक्षा कानूनों को निलंबित किया गया था। काम करने के समय को लेकर भी ढील दी गई थी। इस अध्यादेश को स्थायी तौर पर लागू नहीं किया गया था क्योंकि इससे बड़े पैमाने पर औद्योगिक माहौल बदल सकता था। इसे देखते हुए कैबिनेट में इस एक्ट को वापस ले लिया गया।

प्रताप नारायण विद्यालय को लीज पर देंगे जमीन
प्रदेश कैबिनेट ने लखीमपुर खीरी के चंदन चौकी में गर्वनमेंट ग्रांट एक्ट की जमीन पर स्थापित प्रताप नारायण मिश्रा स्मारक सरस्वती विद्या मंदिर को भूमि लीज पर आवंटित करने पर सहमति दी है। इसके अनुसार प्रदेश सरकार विद्यालय को 1.283 हेक्टेयर भूमि लीज पर आवंटित करेगी।

वन रक्षक नियमावली में संशोधन के प्रस्ताव को नहीं मिली हरी झंडी
कैबिनेट की मंगलवार को हुई बैठक में उत्तर प्रदेश वन विभाग अवर अधीनस्थ (वन रक्षक और वन्यजीव रक्षक) सेवा नियमावली-2015 में संशोधन के प्रस्ताव रखे गए, लेकिन यह पास नहीं हो सका। इसमें प्रमोशन कोटे के पदों को भरने के लिए शारीरिक मानदंडों को शिथिल किए जाना प्रस्तावित किया गया था। बताते हैं कि अप्रशिक्षित या शारीरिक मानदंडों को शिथिल किया जाना उचित नहीं माना गया। अब वन विभाग नए सिरे से प्रस्ताव भेजेगा।
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