ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट उत्तर प्रदेश में खेती की नई दिशा तैयार करेगी। खास तौर से यंत्रीकरण और उन्नत बीजों पर काम होगा। इनसे जुड़ी कंपनियां ही निवेश की ज्यादा इच्छुक हैं। कृषि क्षेत्र में 5200 करोड़ रुपये निवेश का प्रस्ताव है। आधुनिक तकनीक को जोड़ने के लिए निवेशक आगे आएंगे तो इसका सीधा लाभ किसानों को होगा।
समिट में बीज, उर्वरक, कृषि-रक्षा एवं रसायन, मशीनरी, विपणन आदि में उद्यम लगाने वाली इकाइयों के निवेशकों से लगातार बात हुई है। मशीनें बनाने वाली कंपनियों के साथ एमओयू किए जा रहे हैं। इसके लिए 100 एफपीओ को बीज विधायन संयंत्र एवं भंडार का काम देने की भी तैयारी है। 25 एफपीओ के लिए बीज उत्पादन क्षेत्र में पांच करोड़ रुपये का एमओयू हुआ है।
कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही के मुताबिक उर्वरक क्षेत्र में 10 कंपनियों से 2200 करोड़, कृषि रक्षा रसायन क्षेत्र में 1500 करोड़ समेत पांच हजार करोड़ से ज्यादा के निवेश की तैयारी है। कृषि विपणन विभाग ने भी 32 एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं। इसमें 714 करोड़ रुपये का निवेश होगा, अन्य कंपनियों ने भी एमओयू किए हैं।
सीड पार्क पर होगा काम, ड्रोन से खेती पर फोकस
हैदराबाद में निवेशकों ने भरोसा दिलाया है कि वह उप्र में सीड पार्क स्थापित करेगा। यह समूह बीजों में लगभग 3500 करोड़ का कारोबार कर रहा है और इतना ही कारोबार यूपी में करना चाहता है। हैदराबाद के कई समूह भी इस समिट में शामिल होंगे। सिंचाई-सोलर पंप एवं अन्य संबंधित उपकरणों में निवेश के लिए गोल्ड इंडस्ट्री नोएडा ने 50 करोड़ के निवेश की बात कही है। कृषि मंत्री के मुताबिक एनसीआर की कई कंपनियां हैं, जो निवेश की इच्छुक हैं।
दूसरी ओर, एग्री क्लीनिक वन स्टॉप योजना के तहत 10,000 इकाइयां स्थापित किए जाने की योजना है। निवेश के जरिए यूपी में खेती का अंदाज एवं तौर तरीका बदलने की तैयारी है। ड्रोन आधारित खेती की राह इस समिट से खुल सकती है। ड्रोन से कीटनाशक आदि का छिड़काव ऐसी तकनीक है, जो अब भारत में भी खूब प्रयोग होने लगी है। इसे यूपी में तेज करने की आवश्यकता है।