गोरखपुर संग्रहालय को मिलीं बुद्ध की अलग-अलग मुद्राओं की नौ कलाकृतियों में से ज्यादातर मथुरा और गांधार शैली की हैं। अलग-अलग मुद्राओं वाली यह कलाकृतियां कुषाण काल, चौथी, पांचवीं, छठवीं, नौवीं, 11वीं, 12वीं शताब्दी की हैं।
लखनऊ के राज्य संग्रहालय से राजकीय बौद्ध संग्रहालय को बृहस्पतिवार को नौ पुरातात्विक कलाकृतियां मिली हैं। राजकीय संग्रहालय में जीर्णोंद्धार कार्य पूरा होने के बाद कलाकृतियों को राहुल सांकृत्यायन वीथिका में दर्शकों के अवलोकनार्थ सजा दिया जाएगा।
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गोरखपुर संग्रहालय को मिलीं बुद्ध की अलग-अलग मुद्राओं की नौ कलाकृतियों में से ज्यादातर मथुरा और गांधार शैली की हैं। अलग-अलग मुद्राओं वाली यह कलाकृतियां कुषाण काल, चौथी, पांचवीं, छठवीं, नौवीं, 11वीं, 12वीं शताब्दी की हैं। इनमें कुछ कलाकृतियां साबूत हैं, तो कुछ खंडित।
कलाकृतियों में कुषाणकालीन शालभंजिका, बुद्ध प्रतिमा का अधोभाग, गंधारकला की कुषाण कालीन उपासक की प्रतिमा, नौवीं शताब्दी का सिरदल का भाग (जिसमें विभिन्न मुद्राओं में बुद्ध प्रतिमाएं बनी हैं) पांचवीं शताब्दी का प्रभामंडल युक्त बुद्ध मस्तक, चौथी शताब्दी का मनौती स्तूप, 11वीं-12वीं शताब्दी का बोधिसत्व अवलोकितेश्वर (दो कलाकृतियां) शामिल हैं।
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राजकीय बौद्ध संग्रहालय के उप निदेशक डॉ. मनोज गौतम ने बताया कि संग्रालय के जीर्णोंद्धार का काम चल रहा है। जल्द ही इन कलाकृतियों को संग्रहालय में सजा दिया जाएगा।