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UP: बिजली कर्मियों ने किया आगाह, निजीकरण हुआ तो लालटेन युग में लौट जाएगा प्रदेश; पहले भी वापस हुए हैं प्रस्ताव

Mon, 23 Jun 2025 09:09 AM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

Electricity in UP: यूपी के बिजली कर्मचारियों ने साफ किया है कि वह 9 जुलाई को राष्ट्रव्यापी हड़ताल करेंगे। इसमें बिजली कर्मचारियों के अलावा दूसरे विभागों के लोग भी शामिल होंगे। 
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बिजली कर्मचारियों की महापंचायत में फैसला। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति की ओर से राजधानी में आयोजित महापंचायत ने निर्णय लिया कि प्रदेश में बिजली कंपनियों के निजीकरण के विरोध में 9 जुलाई को देश के 27 लाख बिजलीकर्मी एक दिन की राष्ट्रव्यापी सांकेतिक हड़ताल करेंगे। बिजलीकर्मी, रेल कर्मचारी, राज्य कर्मचारी, किसान और उपभोक्ता व्यापक आंदोलन का हिस्सा बनेंगे। इसकी तैयारी के तहत 2 जुलाई को देशभर में व्यापक विरोध किया जाएगा। समिति ने चेतावनी दी कि इसके बाद भी प्रबंधन ने फैसला नहीं बदला तो जेल भरो आंदोलन की शुरुआत की जाएगी। अगले चरण में इसकी भी तिथि घोषित की जाएगी।

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 प्रदेश में बिजली निजीकरण का फैसला पहले भी दो सरकारें वापस ले चुकी हैं। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने निजीकरण का फैसला वापस लेने की मांग की है, क्योंकि विद्युत नियामक आयोग ने निजीकरण के फैसले में कई आपत्तियां निकली हैं। इन आपत्तियों से स्पष्ट हो गया है कि निजीकरण का प्रस्ताव ही गलत है।

उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग द्वारा 2006 में उपभोक्ता परिषद की याचिका पर तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह की सरकार में निजीकरण के तहत सेस फ्रेंचाइजी का फैसला वापस हुआ था। यह फ्रेंचाइजी लखनऊ के ग्रामीण क्षेत्र माल, मलिहाबाद, काकोरी से संबंधित था। जिस दिन उसका टेकओवर किया जा रहा था, उसी दिन विद्युत नियामक आयोग द्वारा पूरे मामले पर रोक लगा दी गई थी। ऐसे में सरकार ने फैसला वापस ले लिया। इसी तरह वर्ष 2014 में जब पांच शहरों में बिजली के निजीकरण का मामला तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के कार्यकाल में कैबिनेट से पास हुआ था। मगर उपभोक्ता परिषद की याचिका पर विद्युत नियामक आयोग द्वारा अवमानना नोटिस जारी किए जाने के बाद उसे भी वापस कर लिया गया था। उपभोक्ता परिषद ने आगाह किया है कि यदि जबरन प्रदेश में बिजली का निजीकरण हुआ तो उसके दो नुकसान होंगे। एक तो बिजली के दाम कई गुना बढ़ जाएंगे दूसरी तरफ गांवों की बिजली व्यवस्था फिर से लालटेन युग में लौट जाएगी। 
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फैसला वापस ले सरकार

अब वर्तमान में जब विद्युत नियामक आयोग के सामने उत्तर प्रदेश पाॅवर कॉरपोरेशन का पूरा मसौदा वित्तीय और विधिक सलाह के लिए पेश किया गया तो उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने उसमें बड़े पैमाने पर वित्तीय और सांविधानिक कमियां उजागर करते हुए अपनी अंतिरम रिपोर्ट पेश कर दी है। ऐसे में विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्षा अवधेश कुमार वर्मा ने उत्तर प्रदेश सरकार से मांग की है कि अब निजीकरण का फैसला वापस ले लिया जाए। उन्होंने कहा कि कहा उपभोक्ता परिषद हमेशा से ही कानूनन और सही तथ्य आयोग के सामने रखना चला आ रहा है। इस बार भी उपभोक्ता परिषद की आधा दर्जन लोकमहत्व प्रस्ताव के परिपेक्ष्य में ही उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने उत्तर प्रदेश सरकार के निजीकरण के मसौदे में बड़े पैमाने पर वित्तीय और सांविधानिक कमियां पाई हैं। ऐसे में उत्तर प्रदेश सरकार को जनहित में प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं के हित में अपने फैसले को तत्काल वापस लेना चाहिए।
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