कार्यक्रम में दोना-पत्तल बनाने की 126 सेमी ऑटोमेटिक मशीनों का भी वितरण होना है। इसके लिए प्रयागराज, बाराबंकी, अयोध्या, सीतापुर और लखीमपुर खीरी के 21 लोगों को कार्यक्रम स्थल पर आमंत्रित किया गया है। इस मशीन की खूबी यह है कि इससे उपलब्धता के आधार पर कागज या पत्ते के पत्तल और दोने बनाए जा सकते हैं। कागज के दोने, पत्तल, गिलास या प्लेट बनाने के लिए उसी साइज के रोल और डाई का इस्तेमाल करना होता है। इसकी उत्पादन क्षमता प्रति दिन 2000 तक होती है। मशीन पाने वालों को पहले 15 दिन प्रशिक्षण दिया जाता है। मशीन के साथ कागज का रोल भी दिया जाएगा।