डीजीपी ने कहा कि साइबर क्राइम बड़ी चुनौती हैं। इसके लिए दो रणनीति होनी चाहिए। पहला, ऐसे अपराधों के खुलासे के लिए गुणात्मक सुधार और दूसरा, साइबर अपराध के प्रति जागरूकता। बैंक अपने स्तर से ग्राहकों को जागरूक करता ही है, पुलिस की भी जिम्मेदारी है कि लोगों को साइबर अपराध से बचने के लिए जागरूक करे।
खराब यातायात व्यवस्था से बनती है पुलिस के प्रति गलत धारणा
डीजीपी ने कहा कि खराब यातायात व्यवस्था से पुलिस के प्रति लोगों की गलत धारणा बनती है। ट्रैफिक की वजह से किसी व्यक्ति की ट्रेन, प्लेन या किसी छात्र की परीक्षा छूटती है तो यह पुलिस की कमजोरी ही मानी जाएगी। अगर जाम में फंसी एंबुलेंस में किसी मरीज की जान चली जाए तो पुलिस के बारे में उसके परिजनों की धारणा हमेशा नकारात्मक ही रहेगी। हमारे थोड़े से प्रयास से लोगों को राहत मिल सकती है।
डीजीपी ने कहा कि महिलाओं एवं बच्चों के प्रति अपराध के मामलों में और अधिक संवेदनशील होने की जरूरत है। पिछले दिनों कुछ ऐसी घटनाएं भी सामने आईं जिनमें बच्चियों के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई। ऐसे मामलों की विवेचना हर हालत में समय से पूरी होनी चाहिए।
डीजीपी ने कहा कि बीट सिस्टम और गश्त पुलिसिंग का पारंपरिक तरीका है, जो हमेशा कारगर रहा है। क्षेत्र में सिपाही की मौजूदगी से आम लोगों में सुरक्षा का भाव पैदा होता है, उसका कोई विकल्प नहीं हो सकता। गश्त मिलान की कार्रवाई भी थानों में सुनिश्चित की जाए।
हम लोग हर हफ्ते मिलेंगे
डीजीपी ने कहा, हमलोग हर हफ्ते इसी दिन इसी समय मिलेंगे। जो निर्देश या टास्क दिए गए हैं, उन पर किस जिले में कितना अमल हुआ, इसकी हर सप्ताह समीक्षा की जाएगी।