छांगुर ने उतरौला में अपनी अच्छी खासी पैठ बना ली थी। अब उसकी नजर बलरामपुर शहर में थी। रोडवेज के पास उसने एक जमीन तय की थी। उसके साथ रहे बब्बू चौधरी ने बताया कि शहर में वह संपर्क कार्यालय खोलना चाहता था। जिससे मुहिम को अंजाम देने में सहूलियत मिल सके। अभी इस मामले की छानबीन होना बाकी है। जमीन किसकी है और छांगुर ने नीतू के नाम से लिया या फिर महबूब के नाम लिया है, यह स्पष्ट नहीं हो सका है।
बेटे को दुनिया में सबसे अमीर बनाना चाहता था छांगुर
छांगुर के इकलौता बेटा महबूब था, उसने पूरी ताकत बेटे को दुनिया का सबसे अमीर आदमी बनाने के लिए लगा रखी थी। धर्मांतरण से कमाई करने के साथ ही वह प्रापर्टी व अन्य कार्य करने की जमीन तैयार रहा था। बेटे को अरबपति बनाने के साथ ही पूरी एक टीम का मुखिया बनाना चाहता था। इसके लिए उसने कई लोगों से हाथ भी मिलाए थे। नागपुर के एक प्रभावशाली व्यक्ति से हाथ मिलाने के पीछे उसकी मंशा बेटे को आगे बढ़ाने की थी। फिलहाल अब उसका बेटा लखनऊ जेल में दिन काट रहा है।