राजधानी के तीन प्रमुख चिकित्सा संस्थानों पीजीआई, केजीएमयू और डॉ. राम मनोहर लोहिया संस्थान में प्रोफेसरों की कमी को तात्कालिक तौर पर दूर करने का रास्ता निकाल लिया गया है। इन संस्थानों में रिक्त पदों पर सरकार ने रिटायर प्रोफेसरों को संविदा के आधार पर भर्ती करने का फैसला किया है। चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रस्ताव को मंगलवार को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। प्रदेश में स्थापित एम्स की तर्ज पर संविदा पर नियुक्त होने वाले प्रोफेसरों को 2.20 लाख रुपये प्रतिमाह की दर से पारिश्रमिक दिए जाने का भी फैसला किया गया है।
दरअसल सुपर स्पेशियलिटी वाले इन तीनों संस्थानों में प्रोफेसर (आचार्य) के रिक्त पदों पर भर्ती के लिए हाल में ही सरकार ने विज्ञापन जारी किया था, लेकिन उपयुक्त अभ्यर्थी नहीं मिल पाने की वजह से इन पदों पर स्थाई भर्ती नहीं हो पा रही है। इस वजह से भर्ती की प्रक्रिया लटकी हुई है। इसके मद्देनजर सरकार ने फिलहाल राजकीय मेडिकल कॉलेजों और आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल सर्विसेज से रियाटर चिकित्सा शिक्षकों को संविदा के आधार पर नियुक्त करने का फैसला किया है। प्रस्ताव के मुताबिक 30 जुलाई 2008 में संविदा पर भर्ती के लिए जारी शासनादेश के मुताबिक इन संस्थानों में संविदा पर नियुक्ति की जाएगी।
प्रस्ताव के मुताबिक संविदा पर चिकित्सा शिक्षकों की नियुक्ति प्रयोग के तौर पर फिलहाल अधिकतम पांच साल तक के लिए किया जाएगा। साथ ही नियमित पद न भरे जाने की स्थिति में इनकी अवधि को आगे बढ़ाने पर विचार किया जाएगा। संविदा पर नियुक्त होने वाले प्रोफेसरों को उसी संस्थान में नहीं नियुक्त किया जाएगा।