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UP: दो साल तक हटाए नहीं जा सकेंगे जिला पंचायत अध्यक्ष व ब्लाक प्रमुख

Tue, 15 Mar 2016 02:13 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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अखिलेश यादव - फोटो : अमर उजाला
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उत्तर प्रदेश के जिला पंचायत अध्यक्षों और क्षेत्र पंचायत प्रमुखों को दो साल से पहले हटाया न जा सके, राज्य सरकार ने इसकी कार्यवाही शुरू कर दी है।
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सोमवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अध्यक्षता वाली प्रदेश कैबिनेट ने इसके लिए उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत अधिनियम-1961 की धारा 15 व 28 में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। प्रदेश में पिछले दिनों 74 जिला पंचायत अध्यक्ष के पद पर चुनाव हुआ था। इसमें सत्ताधारी दल सपा के 60 अध्यक्ष जीते थे।

इसी तरह क्षेत्र पंचायत प्रमुखों के 816 पदों में से 80 फीसदी पर सपा ने जीत का दावा किया था। सरकार ने अब इन जिला पंचायत अध्यक्षों और ब्लाक प्रमुखों की कुर्सी को मजबूती देने और इन्हें हटाने की व्यवस्था को कठिन बनाने से जुड़ी कार्यवाही शुरू कर दी है।
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प्रमुख सचिव पंचायतीराज चंचल कुमार तिवारी ने बताया कि अभी जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लाक प्रमुख के खिलाफ कार्यकाल का एक साल पूरा होने के बाद अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकता है। अब दो साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद ही इनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकेगा।

इसके अलावा जिला पंचायत अध्यक्षों व ब्लाक प्रमुखों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए वर्तमान में कुल सदस्य संख्या के आधे सदस्यों के हस्ताक्षर पर आवेदन होना चाहिए।
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कम से कम दो तिहाई सदस्यों के हस्ताक्षर होंगे जरूरी

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव - फोटो : amar ujala
कैबिनेट ने अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए कम से कम दो तिहाई सदस्यों के हस्ताक्षर को अनिवार्य कर दिया है। सरकार के इस फैसले से जिला पंचायत अध्यक्षों और ब्लाक प्रमुखों की कुर्सी एक साल की जगह दो साल के लिए पक्की हो जाएगी। इसके बाद ही इनके खिलाफ कोई जुबान खोल सकेगा। सरकार के इस फैसले को सियासी फैसले के रूप में देखा जा रहा है।

राज्यपाल की मंजूरी के बाद ही बदलेगी व्यवस्था
शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि चूंकि यह एक्ट में संशोधन है इसलिए इस प्रस्ताव को विधानमंडल के दोनों सदनों से मंजूरी लेनी होगी। इसके बाद राज्यपाल की मंजूरी के  बाद ही नई व्यवस्था लागू हो सकेगी। हालांकि विधानमंडल के दोनों सदनों में सत्ताधारी दल के बहुमत में होने की वजह से इस प्रस्ताव के अटकने की कोई आशंका नहीं है।

सरकारें अपने हिसाब से करती रही हैं फैसले
राज्यपाल के सलाहकार सीबी पांडेय बताते हैं कि सरकारें अपनी सुविधा के हिसाब से एक्ट की इन धाराओं में बदलाव करती रहती हैं। इसमें अब तक कई बार बदलाव हो चुका है। अध्यक्ष व प्रमुखों को हटाने की पूर्व में एक साल और साधारण बहुमत की व्यवस्था थी। बाद में दो तिहाई सदस्य और दो साल किया गया। बसपा भी अपने सुविधा के हिसाब से इसमें बदलाव कर चुकी है। अब एक बार फिर इसमें बदलाव किया जा रहा है।
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