प्रदेश में कुपोषण को खत्म करने को लेकर सरकार के स्तर से करोड़ों रुपये का बजट स्वीकृत होने के बाद भी अधिकारी कुंडली मारे रहे। नतीजा यह हुआ कि स्मार्ट फोन, आधार किट, जीएमडी, प्री स्कूल किट की खरीद नहीं हो सकी और बजट खजाने में ही पड़ा रह गया।
केंद्र और राज्य सरकार की सहभागिता से कुपोषण दूर करने के लिए बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार (आईसीडीएस) और राष्ट्रीय पोषण मिशन निदेशालय के माध्यम से कई कार्यक्रमों का संचालन किया जा रहा है। इसके लिए हर वित्तीय वर्ष में सरकार के स्तर से बजट का भी प्रावधान होता रहा है।
लेकिन बीते दो वित्तीय वर्ष से इन कार्यक्रमों के लिए स्वीकृत बजट को शासन में बैठे अधिकारियों ने खर्च करने की अनुमति ही नहीं दी। नतीजा यह हुआ कि कार्यक्रमों के क्रियान्वयन के लिए उपकरण और संसाधनों की खरीद नहीं हो सकी और बजट खाते में पड़ा रहा।
शबरी संकल्प अभियान शुरू ही नहीं हुआ
मार्च 2017 में प्रदेश की सत्ता संभालते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अति कुपोषित बच्चों की सेहत सुधारने के लिए इस अभियान की घोषणा की थी। अभियान को सरकार ने अतिमहत्वाकांक्षी श्रेणी में रखते हुए पहली कैबिनेट में ही 200 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया था। लेकिन शासन में बैठे अधिकारियों ने अभियान शुरू करने की अनुमति ही नहीं दी। लिहाजा बीते तीन साल से सरकार की यह घोषणा फाइलों में दबी है और स्वीकृत बजट भी बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग के खाते में पड़ा है।