प्रदेश में ज्यादातर विभाग वित्तीय वर्ष के नौ महीने बीतने के बाद भी बजट का 50 फीसदी भी खर्च नहीं कर पाए हैं। बेसिक, माध्यमिक शिक्षा, पीडब्ल्यूडी और नागरिक उड्डयन विभाग बजट खर्च में जहां आगे रहे हैं, वहीं राजस्व, कृषि और एमएसएमई जैसे विभाग बजट खर्च में फिसड्डी रहे हैं।
वित्तीय वर्ष 2019-20 में कुल 526809.21 करोड़ के बजट की तुलना में प्रदेश सरकार ने दिसंबर तक 84 विभागों को 317951.63 करोड़ रुपये जारी किए थे, लेकिन विभाग सिर्फ 242872.31 करोड़ ही खर्च कर सके हैं।
प्रदेश सरकार ने सत्ता संभालते ही किसानों की आय दोगुना करने का संकल्प लिया था। किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार ने कई योजनाएं लागू कीं। किसानों के लिए सरकार ने कृषि विभाग को 6245.91 करोड़ का बजट दिया था।
नौ माह में विभाग को 4812.21 करोड़ रुपये जारी भी किए गए, लेकिन विभाग 2658.96 करोड़ रुपये ही खर्च कर सका। पर्यटन विभाग को 1022.62 करोड़ का बजट दिया गया। नौ माह में 391.69 करोड़ रुपये जारी भी हुए, लेकिन विभाग मात्र 177.71 करोड़ ही खर्च कर सका।
सरकार ने लघु, सूक्ष्म एवं मध्यम उद्योग विभाग (एमएसएमई) के जरिए ओडीओपी जैसी योजनाएं लागू कर पारंपरिक उद्योगों को बढ़ावा देने की पहल की है। लेकिन विभाग सरकार से बजट मिलने के बाद भी राशि खर्च नहीं कर पाया है। विभाग के लिए 627.98 करोड़ का बजट प्रावधान था।
इसकी तुलना में विभाग को 298.39 करोड़ रुपये दिए भी गए, लेकिन विभाग सिर्फ 71.36 करोड़ ही खर्च सका। युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और कौशल विकास पर सरकार ने खुले हाथ से बजट जारी किया।
1041.30 करोड़ के बजट प्रावधान में से सरकार ने नौ माह में 899.19 करोड़ रुपये जारी किए, लेकिन विभाग ने 452.32 करोड़ रुपये ही खर्च किए। इसी तरह ग्र्राम्य विकास विभाग के लिए 22481.26 करोड़ का बजट प्रावधान है। लेकिन विभाग को 40 प्रतिशत से भी कम 8263.78 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए और विभाग ने 4619.82 करोड़ रुपये खर्च किए।
बजट खर्च में नागरिक उड्डयन विभाग अव्वल
पीडब्ल्यूडी के लिए वित्तीय वर्ष में 23329.82 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है। नौ माह में 1796.57 करोड़ का बजट जारी किया। नई सड़कों के निर्माण और सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के लिए विभाग ने 13642.92 करोड़ रुपये खर्च किए। इसी तरह नागरिक उड्डयन विभाग ने स्वीकृत 1371.01 करोड़ रुपये में से 1363.14 करोड़ रुपये खर्च किए। इसमें ज्यादातर राशि जेवर एयरपोर्ट के लिए अल्प समय में जमीन अधिग्रहण से लेकर निविदा प्रक्रिया पूरी करने में लगी।
विभाग बजट प्रावधान स्वीकृत खर्च
- बेसिक शिक्षा 59879.69 44794.14 37535.05
- माध्यमिक शिक्षा 12217.32 11129.10 9363.86
- खाद्य एवं रसद 14257.37 14100.04 10308.78
- ग्रामीण अभियंत्रण 490.32 490.32 230.47
- लोक निर्माण 23329.82 17963.57 13642.92
- नागरिक उड्डयन 2203.96 1371.01 1363.14
- अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास 9465.93 6038.08 5440.08
- चिकित्सा शिक्षा 6509.65 4857.56 3946.89
ये विभाग रहे पीछे
विभाग बजट प्रावधान स्वीकृत खर्च
- ग्राम्य विकास 22481.26 8263.78 4619.82
- कृषि 6245.91 4812.21 2658.96
- लघु सिंचाई, भूगर्भ जल 782.47 699.79 305.75
- जेल प्रशासन एवं सुधार गृह 1165.65 942.69 556.79
- पर्यटन 1022.62 391.69 177.71
- सामान्य प्रशासन, धर्मार्थ कार्य 252.52 94.67 11.63
- एमएसएमई 627.98 298.39 71.36
- राज्य संपत्ति 367.90 367.90 152.77
- पर्यावरण 15.38 13.85 3.84
- राजस्व, अभाव, दैवी आपदा 8046.22 6221.48 2972.89
- व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास 1041.30 899.19 452.32
- निर्वाचन 621.74 598.39 265.51
- कार्मिक, प्रबंधन अकादमी, 200.58 200.20 78.32
- लोक सेवा आयोग