विभागीय जांच में पाया गया कि एक अप्रैल 2024 से निर्माण कार्यों की कार्यदायी संस्थाओं और सरकारी संस्थाओं को जितना बजट जारी किया गया है उस हिसाब से टैक्स नहीं मिला है। इसे देखते हुए कार्यदायी संस्थाओं द्वारा जिन ठेकेदारों को टेंडर दिया गया है उनके एस्टीमेट का मिलान फाइनल बिल और दाखिल रिटर्न से किया जाएगा। इस जांच के लिए एक हफ्ते का समय दिया गया है। टैक्स चोरी पर लगाम के लिए रेकी की गुणवत्ता पर जोर दिया गया है क्योंकि पूरे प्रदेश में अब तक महज 400 फर्मों में ही कमी मिली है जो बहुत कम है।
सरकारी संस्थाओं से वसूली में सफलता के बाद तेजी
लखनऊ में राज्य कर की विशेष जांच शाखा (एसआईबी) ने उप्र. जल निगम से 54 करोड़ रुपये की रिवर्स आईटीसी कराई। इसी तरह लखनऊ में ही वर्क कॉन्ट्रैक्ट की दो प्रमुख फर्मों को 5300 करोड़ और 742 करोड़ का टेंडर मिला जिनसे जीएसटी का आकलन किया जा रहा है।