कांशीराम की पुण्यतिथि पर हुई रैली में बसपा प्रमुख मायावती ने विधानसभा चुनाव 2022 के लिए अपना फॉर्मूला साफ कर दिया। उन्होंने जिस तरह से दलितों के साथ साथ ब्राह्मणों और मुस्लिमों पर बात की, उसने स्पष्ट कर दिया कि वे वर्ष 2007 की सोशल इंजीनियरिंग की तरफ लौट रही हैं। उनकी बीएमडी (ब्राह्मण, मुस्लिम, दलित) के गठजोड़ से ही चुनावी वैतरणी को पार करने की योजना है।
दरअसल, चुनावी आगाज के लिए बसपा को इसी तरह की बड़ी रैली की दरकार थी। रैली की खास बात यह रही कि जहां से दो बसों से कार्यकर्ताओं को लाने का लक्ष्य था वहां से सात से दस बसों में बैठकर कार्यकर्ता आए। इसका परिणाम रहा कि रैली में खासी भीड़ जुट गई। इससे उत्साहित मायावती ने अपना एजेंडा स्पष्ट कर दिया। चूंकि रैली में काडर वोटरों के अलावा ब्राह्मणों और मुस्लिमों को लाने पर ज्यादा फोकस था। इसलिए मायावती ने साफ कहा कि बसपा यदि सत्ता में आई तो ब्राह्मणों एवं मुस्लिमों के सम्मान एवं सुरक्षा का पूरा ख्याल रखा जाएगा। हालांकि उन्होंने जाटों एवं गुर्जरों का भी जिक्र कर भाजपा और सिखों का जिक्र कर कांग्रेस को घेरने की कोशिश करते हुए सर्वसमाज की बात की। लेकिन फोकस दलित, ब्राह्मण और मुस्लिमों पर किया।
बसपा ने वर्ष 2007 में सोशल इंजीनियरिंग के जरिए पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी। इसके तहत 139 सीटों पर सवर्ण उम्मीदवारों को टिकट दिया था। इसके बाद के चुनावों में बसपा ने मुस्लिम कार्ड तो खेला पर 2007 जैसी सोशल इंजीनियरिंग न होने से बात नहीं बनी। मायावती यह जानती हैं कि निश्चित रूप से उनके पास दलितों का बड़ा वोट बैंक है, लेकिन सिर्फ उनके सहारे चुनावी वैतरणी पार नहीं हो सकती है। इसलिए उन्होंने सीधा ब्राह्मणों और मुस्लिमों पर फोकस किया है।
मुस्लिमों को जोड़ने की रणनीति
बसपाई रणनीतिकारों ने अपने मुस्लिम नेताओं के जरिए एक मंत्र फूंका है जिसका असर रैली में भी देखने को मिला। मुस्लिमों से कहा जा रहा है कि जो सपा अपने सांसद आजम खां तक को नहीं बचा सकी वह आम मुस्लिमों के हितों की रक्षा कैसे करेगी। रैली में आए मुस्लिम भी इसी को दोहराते दिखे। मुस्लिमों का सपा के प्रति रुझान देखकर बसपा इसकी काट ढूंढ़ रही है।
दिग्गजों के बिना भी भीड़ देखकर बसपाई गदगद
बसपा में इस समय दिग्गजों का अभाव है। बसपाई सिपहसालार लगातार बसपा को छोड़कर दूसरे दलों में जा रहे हैं, पर इस रैली में उमड़ी भीड़ से बसपा में जबरदस्त उत्साह है। को-ऑर्डिनेटरों तथा संगठन के लोगों ने जो भीड़ जुटाई उससे बसपाई खुश हैं। मायावती ने भी इस भीड़ के जरिए विपक्षियों पर निशाना साधने में कोई कसर नहीं छोड़ी।