33 साल तक अपहरण व दुष्कर्म के आरोपों का सामना कर रहे आरोपी को फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम/एडीजे कल्पराज सिंह ने साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है। कोर्ट ने यह फैसला अपहरण व दुष्कर्म की पीड़ित किशोरी के गवाही देने से मुकर जाने के बाद सुनाया है। अदालत ने झूठी गवाही देने पर पीड़िता के खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश दिया है। मामला कुड़वार थाना (अब बंधुआकलां थाना) से जुड़ा है।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक सात अक्तूबर 1988 को कुड़वार थाने के एक गांव की किशोरी के अपहरण का मामला समाने आया था। पुलिस ने किशोरी के पिता की तहरीर पर प्रतापगढ़ के कोतवाली नगर के महुली गांव निवासी राजकुमार हलवाई, मुनव्वर, सुधीर व राज कुमार के खिलाफ अपहरण व दुष्कर्म का केस दर्ज किया था। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की थी।
आरोपी राजकुमार के लगातार गैर हाजिर रहने पर उसकी पत्रावली अलग करके अन्य नामजद आरोपियों का फैसला कोर्ट सुना चुकी है। आरोपी राजकुमार के कोर्ट में हाजिर होने पर उसका ट्रायल फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम की अदालत में हुआ। मुकदमे के दौरान कोर्ट में पेश हुई पीड़िता गवाही देने से मुकर गई है। उसने मुख्य बयान में अपहरण व दुष्कर्म की घटना का समर्थन किया, लेकिन जिरह में होस्टाइल (मुकर गई) हो गई।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता अशोक शुक्ल ने कहा कि आरोपी को फर्जी केस में फंसाया गया है। वह बेगुनाह 33 साल से अपहरण व दुष्कर्म जैसे गंभीर आरोप का सामना कर रहा है। फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम/एडीजे कल्पराज सिंह ने साक्ष्य के अभाव में आरोपी को बरी कर दिया है। न्यायाधीश ने कोर्ट में झूंठी गवाही देने पर पीड़िता के खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश दिया है।