राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने महंगी बिजली खरीद और निजीकरण के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बिजली दर की सुनवाई के दौरान बिजली दर बढ़ोतरी के प्रस्ताव को खारिज करने के लिए परिषद विधिक तथ्य रखेगा। परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि बिजली दर बढ़ाने का प्रस्ताव ही असांविधानिक है। पहले उपभोक्ताओं का 33122 करोड़ रुपया लौटाया जाए फिर बढोतरी पर बात की जाए।
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम को निजीकरण के जरिए तीन हिस्से में बांटने का प्रस्ताव तैयार किया गया है, जबकि 11 जुलाई को सुनवाई हो रही है। ऐसे में अप्रैल 2026 तक निजीकरण पर बात करना भी असांविधानिक है। इसी तरह वर्ष 2025-26 के लिए करीब 162130 मिलियन यूनिट बिजली खरीदने का प्रस्ताव है, जिस पर 86952 करोड़ खर्च होगा। प्राइवेट सेक्टर से करीब 64805 मिलियन यूनिट बिजली खरीदी जा रही है, जिसकी लागत 35121 करोड़ प्रस्तावित है। जबकि राज्य विद्युत उत्पादन निगम से 38878 मिलियन यूनिट बिजली करीब 20670 करोड़ में खरीदने का प्रस्ताव है।