विधानसभा चुनाव के दौरान आबकारी विभाग की प्रवर्तन टीम ने सख्ती तो खूब दिखाई। लगभग 93 हजार छापे मारें पर जहरीली शराब की बिक्री नहीं रुक पाई। ऐसी शराब पीकर आजमगढ़ में सात लोगों की मौत हो गई। यह हाल तो तब रहा जबकि पिछले माह ही रायबरेली में भी जहरीली शराब के सेवन से दस लोगों की मौत हो गई थी। टीमों का ध्यान कच्ची शराब पर ज्यादा रहा और दुकानों पर जहरीली शराब की बिक्री होती रही।
चुनाव में अवैध या जहरीली शराब की बिक्री रोकने को विशेष प्रवर्तन अभियान चलाया जा रहा है। अब तक मारे गए लगभग 93 हजार छापों में लोगों पर सख्त कार्रवाई करने के दावे किए जा रहे हैं। 12 हजार से ज्यादा मुकदमे दर्ज किए गए हैं तथा लगभग सात लाख लीटर अवैध शराब बरामद की जा चुकी है। लगभग 12 लाख किग्रा लहन भी टीम ने मौकेपर ही नष्ट किया है। इसके अलवा लगभग तीन हजार सात सौ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और सौ से ज्यादा वाहन जब्त किए जा चुके हैं। बावजूद इसके जहरीली शराब की बिक्री हो रही है।
आजमगढ़ में बड़ी घटना हुई है जबकि इस मंडल में भी प्रवर्तन विभाग छापे मार रहा है और हाल ही में यहां 1268 लीटर अवैध शराब पकड़ी गई थी। दरअसल खास बात यह रही कि टीम का सारा ध्यान कच्ची शराब पर रहा और शराब की दुकानों पर अवैध या जहरीली शराब की बिक्री होती रही। यदि रायबरेली की घटना से सबक लिया होता तो आजमगढ़ में इसकी पुनरावृत्ति न होती। उधर, अपर मुख्य सचिव आबकारी संजय आर भूसरेड्डी कहते हैं कि टीमें लगातार काम कर रही है। इस घटना की तफ्तीश चल रही है और दोषियों पर कार्रवाई होगी।