देशभर के सात अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) निदेशक की दौड़ में प्रदेश के 20 प्रोफेसर शामिल हैं, जिसमें एसजीपीजीआई के छह और केजीएमयू के पांच प्रोफेसर हैं। साक्षात्कार से पहले ये प्रोफेसर सत्ता के गलियारे में पैठ बनाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं। कोई दिल्ली में गोटी बिछा रहा है तो कोई लखनऊ के जरिए लामबंदी में जुटा है।
एम्स भोपाल, भुवनेश्वर, पटना, दरभंगा, ऋषिकेश, गुवाहाटी, अवंतिपुरा (जम्मू) निदेशक के लिए आवेदन मांगे गए थे। इसमें 220 प्रोफेसरों ने आवेदन किया था। स्क्रीनिंग के दौरान 112 नाम फाइनल किए गए हैं। अब इन्हें साक्षात्कार के लिए बुलाया जाएगा। इसमें उत्तर प्रदेश के 20 प्रोफेसर शामिल हैं।
केजीएमयू के सीएमएस व यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो एसएन शंखवार, पीडियाट्रिक सर्जरी के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो एसएन कुरील, पीडियाट्रिक आर्थोपेडिक्स विभागाध्यक्ष प्रो अजय सिंह, फिजियोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो सुनीता तिवारी, सर्जरी विभागाध्क्ष प्रो एए सोनकर, एसजीपीजीआई के सर्जिकल गैस्ट्रोइंटोलॉजी विभाग के प्रो अशोक कुमार, इंडोक्राइन सर्जरी के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो एसके मिश्रा, न्यूरो सर्जरी विभाग के प्रो संजय बेहारी, सीटीवीएस विभागाध्यक्ष प्रो निर्मल कुमार गुप्ता, सर्जिकल गैस्ट्रोइंटोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. राजन सक्सेना, न्यूक्लीयर मेडिसिन विभागाध्यक्ष डा. संजय गंभीर, लोहिया संस्थान के पूर्व निदेशक प्रो दीपक मालवीय, बीएचयू के प्रो अजय कुमार खन्ना, पूर्व डीजीएमई प्रो. केके गुप्ता, राजा दशरथ स्टेट मेडिकल कॉलेज अयोध्या के प्रधानाचार्य प्रो. विजय कुमार, एसएन मेडिकल कॉलेज आगरा के प्रधानाचार्य रहे प्रो गिरीश कुमार अनेजा, एएस मेडिकल कॉलेज शाहजहांपुर के प्रधानाचार्य प्रो. अभय कुमार, यूपीयूएमएस सैफई के पूर्व कुलपति प्रो. राजकुमार, प्रति कुलपति प्रो रमाकांत यादव, डीन प्रो. आलोक कुमार शामिल हैं।
साक्षात्कार के बाद इसमें से सात निदेशक तय किए जाएंगे। ऐसे में निदेशक पद के दावेदार अब सियासी गणित बैठाने में जुटे हैं। इन दावेदारों में कोई दिल्ली में डेरा डाले है तो कोई लखनऊ में चक्कर काट रहा है। शैक्षिक योग्यता के बाद अब सियासी दांवपेंच भी आजमाए जा रहे हैं।