प्रदेश सरकार ने सामान्य परिस्थितियों में वित्त वर्ष 2021-22 में केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी 1.74 लाख करोड़ रहने का अनुमान लगाया था। केंद्र ने इस आम बजट में 1.19 लाख करोड़ का अनुमान लगाया है, जो राज्य के अनुमान से 55 हजार करोड़ कम है।
केंद्रीय करों में इस तरह हिस्सेदारी घटने की नौबत
मद-- 2020-21 (बजट अनुमान)-- 2020-21 (संशोधित अनुमान)-- 2021-22 (बजट अनुमान)
निगम कर-- 43,251.70-- 28,303.17-- 34,737.76
आय कर-- 40,216.34-- 28,834.50-- 35,300.11
सेंट्रल जीएसटी-- 42,559.40-- 31,307.48-- 38,577.42
कस्टम-- 8,776.32-- 6,561.27-- 7,214.34
केंद्रीय उत्पाद शुल्क-- 734.15-- 3,510.44 3,493.62
सर्विस टैक्स-- 74.99-- 102.92-- 73.55
योग-- 1,40,611.48-- 98,618.40-- 1,19,395.30
नोट-आंकड़े करोड़ रुपये में हैं।
केंद्रीय करों में हिस्सेदारी घटने के बावजूद यूपी को केंद्र से करीब 2 लाख करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है। हालांकि यह भी प्रदेश सरकार के मध्यकालिक राजकोषीय पुन:संरचना नीति-2020 में लगाए गए अनुमान 2.65 लाख करोड़ रुपये से 61 हजार करोड़ कम है।
इस दो लाख करोड़ में केंद्रीय करों के रूप में प्रदेश को 1,19,395.30 करोड़ का आवंटन भी शामिल है। दरअसल राज्यों को केंद्रीय करों में हिस्सेदारी के अलावा केंद्र सहायतित योजनाओं व 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार स्थानीय निकायों व एसडीआरएफ आदि मद में सहायता मिलती है।
- केंद्र सहायतित परियोजनाओं व एनडीआरएफ के लिए आम बजट में राज्यों के लिए 3,75,746 करोड़ रुपये का प्रस्ताव है। जानकार बताते हैं कि यूपी को करीब 15 फीसदी आवंटन मिल पाता है। इस हिसाब से 56,361 करोड़ रुपये मिल सकते हैं।
- ग्रामीण व शहरी स्थानीय निकायों के अनुदान व राज्य आपदा मोचक निधि के लिए सहायता तथा अंतरण के पश्चात राजस्व घाटा अनुदान मद में केंद्र ने 2,20,843 करोड़ का प्रस्ताव किया है। यूपी को इन मदों में करीब 13 प्रतिशत आवंटन मिलता रहा है। इस हिसाब से 28,709 करोड़ रुपये मिल सकते हैं।
- इस तरह केंद्र से सभी तीन तरह की सहायता मिलाकर 2.04 लाख करोड़ रुपये मिल सकते हैं।