उमा भारती ने महिलाओं से आर्थिक तौर पर स्वावलंबी बनने का आह्वान किया। कहा कि ओडीएफ प्लस अभियान में महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रत्येक महिला के लिए महीने में चार-पांच दिन आते हैं जब उन्हें सेनेटरी नैपकिन मिलना जरूरी है। इस विषय पर मैं आस्था की स्वतंत्रता का सम्मान करूंगी, उस पर कुछ नहीं बोलूंगी लेकिन हर महिला को सेनेटरी नैपकिन प्राप्त करने का अधिकार है।
उन्होंने कहा, हमने केंद्रीय कौशल विकास मंत्री से बात की है। सेनेटरी नैपकिन बनाने में बड़ी कंपनियों के कब्जे के बजाय गांव में सेल्फ हेल्प ग्रुप बनाकर इनका निर्माण कराया जाए। इससे स्वरोजगार पैदा होगा और महिलाओं, बच्चियों को सस्ती व साफ नैपकिन मिलेगी।
महिला प्रधानों से अपील, न दहेज दीजिए, न लीजिए
उमा भारती ने कहा कि बेटी को बचाना है तो महिला सरपंचों, ग्राम प्रधानों को संकल्प लेना होगा कि बेटी की शादी में दहेज नहीं देंगे और न ही बेटे की शादी में दहेज लेंगे। दहेज देकर खरीदा हुआ लड़का नौकर तो हो सकता है पति नहीं। बाजार में खच्चर बेंचे जाते हैं बेटे नहीं। कहा कि शादी में दहेज के कारण ही बेटियों को बोझ माना जाता है।