आज पूरी दुनिया अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का जश्न मना रही है। जश्न मनाने का तरीका अलग-अलग हो सकता है, लेकिन मकसद सिर्फ और सिर्फ बेटियों के हक में एक ऐसा आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक सुरक्षा कवच विकसित करना होना चाहिए, जो उन्हें सुरक्षित माहौल दे सके, स्वस्थ समाज दे सके।
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जश्न के उल्लास के बीच भी हमें गंभीर मुद्दों को साथ लेकर चलना होगा। यह पहला मौका है, जब हम महिला दिवस मनाएंगे और हमारे साथ होंगी राजधानी की पहली प्रथम नागरिक यानी महिला मेयर संयुक्ता भाटिया।
हालांकि सुरक्षा जैसे मुद्दों से उनका सीधा सरोकार नहीं, लेकिन शहर की मुखिया होने के नाते उनके सुझाव, उनका ओहदा, महिला सुरक्षा के मानकों को लागू कराने में मददगार साबित हो सकता है। ‘अमर उजाला’ से खास बातचीत में उन्होंने ‘वीमेन फ्रेंडली लखनऊ’ को लेकर अपनी योजनाओं पर विस्तार से बात की।
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टूटा 100 साल का रिकॉर्ड
मेयर संयुक्ता भाटिया
- फोटो : डेमो
1960 में लखनऊ नगर निगम बना था। 57 साल के इतिहास में अब तक 18 नगर प्रमुख और महापौर चुने जा चुके हैं। 21 नवंबर 2002 से नगर निगम में नगर प्रमुख को महापौर का नाम दिया गया।
आज फिर दुनिया अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का जश्न मना रही है। हालांकि उत्तर प्रदेश म्युनिसिपल एक्ट 1916 में बना था। तब से अब तक लखनऊ में कोई भी महिला मेयर नहीं बनी। 100 साल का रिकॉर्ड तोड़ते हुए संयुक्ता भाटिया ने एक दिसंबर 2017 को लखनऊ मेयर का पद संभाला।
सवाल- मेयर बनने से पहले और बनने के बाद के हालात, खासकर महिलाओं के परिप्रेक्ष्य में कितना बदला पाती हैं ?
जवाब- यह कड़वा सच है कि एक महिला को आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक मंच पर हमेशा संघर्ष करना ही पड़ता है। चुनौतियां ज्यादा होती हैं, हमारे शहर में भी ऐसा ही है। फिर भी मैंने हमेशा यही माना और स्वीकार किया कि ज्यादा मेहनत ही तो करनी होगी, पर खुद की काबलियत साबित करके रहूंगी।
पढ़ें, सवाल
मेयर संयुक्ता भाटिया
- फोटो : डेमो
सवाल- शहर को कैसे वीमेन फ्रेंडली बनाएंगी ?
जवाब- नगर निगम ने इंटरनेशनल वीमेन्स डे पर ‘ट्रिपल-एस’ का मॉडल तैयार किया है। इसके तहत हम स्वच्छता, सुरक्षा और शौचालय के मॉड्यूल पर काम करेंगे।
सवाल- पार्षद पतियों की समानांतर व्यवस्था कई सालों में गहरी होती चली गई, नतीजा महिलाओं की आजादी का बेजा इस्तेमाल होने लगा। इसे कैसे जड़ से मिटाएंगी आप?
जवाब- मैंने अपनी पहली ही मीटिंग में पार्षद पतियों के आने पर रोक लगा दी थी। कार्यकारिणी की मीटिंग में भी उनके आने पर प्रतिबंध है। आगे भी इसे सख्ती से लागू किया जाता रहेगा।
सवाल- महिला पार्षदों की हिचक कैसे टूटेगी? खासकर ‘पार्षद पति’ के प्रभाव से उन्हें निकालने के लिए आप क्या करेंगी?
जवाब- महिला पार्षदों को उनके अधिकारों के लिए जागरूक करने, नगर निगम की कार्यप्रणाली से रूबरू कराने, एक पार्षद की जिम्मेदारियों और उसे पूरा करने के लिए जरूरी प्रयासों के बारे में प्रशिक्षित करेंगे। इसके लिए जल्द ही उनके लिए ट्रेनिंग सेशन भी होंगे।
बनेंगे 45 पिंक टॉयलेट
- फोटो : डेमो
माय ट्रिपल एस मॉडल एस1 यानी शौचालय : बनेंगे 45 पिंक टॉयलेट,फीडिंग व चेंजिंग रूम भी होगा
महापौर ने बताया कि नगर निगम ने फिलहाल 45 पिंक टॉयलेट का प्रस्ताव तैयार किया है। इसके लिए जगह चिन्हित की जा रही है। जरूरत पड़ने पर पिंक टायलेट की संख्या बढ़ाई जाएगी।
एक पिंक टॉयलेट इंदिरागांधी प्रतिष्ठान के पास तैयार है, इसे जल्द ही शुरू किया जाएगा। खास बात है कि इसमें फीडिंग व चेंजिंग रूप भी अटैच होगा।
मेयर ने बताया कि कुछ दिन पहले हवाई यात्रा के दौरान उन्होंने देखा कि एक महिला अपने बच्चे को फीडिंग कराने को लेकर काफी परेशान थी, उसी दौरान ये विचार मन में आया। इसके अलावा हम पिंक टॉयलेट को अलार्मिंग सिस्टम से कनेक्ट करवाएंगे, ताकि असुरक्षा महसूस होने पर महिला उसका इस्तेमाल कर सके
एस2 यानी सुरक्षा : बसों में अलार्म होगा अनिवार्य
मेयर ने बताया कि परिवहन मंत्री के साथ बीते दिनों मुलाकात में यह प्रस्ताव तैयार हुआ कि मेट्रो की तर्ज पर बसों में अलार्म सिस्टम को अनिवार्य किया जाए। जल्द ही इस संबंध में अलगी बैठक होगी, जिसमें इसे लागू करवाने की रणनीति पर बात होगी।
एस3 यानी स्वच्छता : कूड़ा उठवाओ, ईनाम पाओ प्रतियोगिता
महापौर ने बताया कि इस प्रतियोगिता के तहत नगर निगम गली-मोहल्लों, अपार्टमेंट-कॉलोनियों की महिलाओं को समूह बनाकर सफाई को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित करेगा।
अपने-अपने क्षेत्र के लोगों को सड़क पर थूकने से मना करने, पौधे लगवाने, कूड़ा इधर-उधर न फेंकने देने के लिए प्रेरित करने वाली महिलाओं को अगले साल महिला दिवस पर सम्मानित किया जाएगा।