‘फरवरी की शुरुआत से ही यूक्रेन में तनाव नजर आने लगा था। युद्ध छिड़ने की आशंका थी, जो 24 फरवरी को हकीकत में बदलती दिखी। हमारे मेडिकल कॉलेज के ऊपर से एक के बाद एक ,चार फाइटर प्लेन गुजरे। काफी दूर धमाकों की आवाज भी सुनाई दी। पहले से चेतावनी मिलने से हम भागकर बंकर में छिप गए। कुछ घंटे बाद बाहर निकले तो आसपास माहौल सामान्य दिखा। यह राहत उस वक्त काफूर हो गई, जब पता चला कि 30-40 किमी यूक्रेन का हवाई अड्डा रूसी फाइटर प्लेन ने तबाह कर दिया है। इसके बाद घर वापसी के हालात बन गए। कानों में अब भी फाइटर प्लेन और धमाकों की आवाज गूंज रही है।’ मंगलवार को अमौसी हवाईअड्डे पहुंच राजधानी समेत प्रदेश के पांच बच्चों ने यूक्रेन का यह खौफनाक मंजर बयां किया। वहीं, इन्हें देखते ही परिवारीजन ने अपने सीने से लगा लिया। बच्चों को सकुशल देख उनके खुशी के आंसू नहीं थम रहे थे।
48 घंटे बाद मिला बॉर्डर पार करने का मौका
मैं और मेरी मौसेरी बहन विनिशिया मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई करते हैं। 25 फरवरी को हम रोमानिया के लिए चले। बॉर्डर पर काफी भीड़ थी। हमने करीब आठ किमी का रास्ता पैदल पार किया। उस समय बर्फबारी भी होने लगी, जिससे मुश्किल बढ़ गईं। साथ में जो बिस्किट व खाने की सामग्री रखी थी, सब खत्म हो रही थी। 48 घंटे कतार में लगने के बाद बॉर्डर पार करने का मौका मिला। 28 फरवरी की रात हम मुंबई पहुंचे और वहां से लखनऊ के लिए रवाना हुए। मेरी बहन अपनी बुआ के यहां मुंबई में ही रुक गई।
आकांक्षा चौरसिया, एकतानगर, ठाकुरगंज
ताउम्र याद रहेंगे दहशत के वो 144 घंटे
हमले के बाद वीन्नित्स्या में भारतीय छात्रों के लिए हालात अचानक से बदल गए। छात्रों को अपनी जिम्मेदारी पर शहर छोड़ने का निर्देश दे दिया गया। हमारी सुध व जिम्मेदारी लेने वाला कोई नहीं था। भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने कोई मदद नहीं की। 26 फरवरी को 59 बच्चों ने पैसे जोड़कर दो लाख दस हजार रुपये में बस किराये पर ली। उसमें भारत का झंडा बांधकर रोमानिया बार्डर के लिए निकल पड़े। बस ने 27 फरवरी को बार्डर से आठ किमी दूर उतार दिया। वहां से पैदल रोमानिया बार्डर गए। हम खुशकिस्मत थे, नहीं तो शाम छह बजे के बाद कई बच्चों को बार्डर भी नहीं पार करने दिया गया। रोमानिया में हमें खाना-पीना मिला। वहां एक सिमकार्ड दिया गया, जिससे परिवारीजन को सकुशल होने की खबर दे सका। मंगलवार शाम 6 बजकर 20 मिनट पर फ्लाइट लखनऊ पहुंची तो दिल को सुकून मिला। उम्मीद है कि जल्द सब ठीक होगा, लेकिन दहशत के वो 144 घंटे ताउम्र याद रहेंगे।
नदीम अख्तर खान, सर्वोदय नगर, इंदिरानगर
मदद का मिला आश्वासन
चाचा जमालुद्दीन से लिपटकर नदीम भावुक हो गया। एडीएम विपिन कुमार मिश्रा ने उसका स्वागत किया और हर संभव मदद का आश्वासन दिया। नदीम मूलरूप से अंबेडकरनगर के हरसम्हार गांव का रहने वाला है। लखनऊ में चाचा जमालुद्दीन खान के साथ रहकर पढ़ाई की है। पिता कमालुद्दीन खान किसान हैं, जबकि मां नाजमा खातून का इंतकाल हो चुका है। वह विन्नित्स्या नेशनल पिरोगोव मेमोरियल मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस के चौथे वर्ष का छात्र है। नदीम ने भारत सरकार से गुजारिश की है कि यूक्रेन बार्डर पर किसी अफसरों को बच्चों को सकुशल बॉर्डर पार करने के लिए तैनात किया जाए।
मैं तो आ गया, पर दोस्तों की भी करनी है मदद
यूक्रेन में हो रहे हमले से निकलना बड़ी चुनौती थी। हालात खराब होने लगे तो सबसे जरूरी था धैर्य बनाए रखना। हम लोगों ने 25 फरवरी को बस की व्यवस्था की। बॉर्डर पर लंबे इंतजार के बाद आखिरकार हम वतन लौट आए। मैं फिलहाल दिल्ली में ही रुककर यूक्रेन में फंसे दोस्तों के लिए मदद का इंतजाम करूंगा। हम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों की लोकेशन जानने का प्रयास करेंगे और इसे यहां के अधिकारियों को बताएंगे। इससे उन्हें भी सुरक्षित निकालकर भारत लाया जा सके।
शशांक मिश्रा, विक्रम नगर आरडीएसओ
‘स्टॉप द ब्लेम गेम’
शशांक मिश्रा ने पूरे सफर के अनुभव और फुटेज का वीडियो साझा किया है। इसका शीर्षक उन्होंने ‘स्टॉप द ब्लेम गेम’ रखा है। उनके अनुसार इस समय देश में लोग एक-दूसरे को दोषी ठहरा रहे हैं। इससे कुछ हासिल नहीं होना है। जरूरी है कि इस समय हम धैर्य बनाए रखें। एक-दूसरे की मदद करें, शब्दों से ही सहूलियत देने की कोशिश करें। ऐसा करके एक दूसरे की हिम्मत बढ़ाएंगे और इस मुश्किल से निकलने का रास्ता भी बना पाएंगे।
मोहनलालगंज का छात्र आज पहुंचेगा दिल्ली
यूक्रेन में युद्ध की दहशत के बीच मोहनलालगंज के खुजौली का ताहिर हुसैन मंगलवार सुबह दिल्ली पहुंच जाएगा। इसके अलावा लखनऊ की मधु वर्मा व गरिमा गुप्ता भी सुरक्षित दिल्ली पहुंच जाएंगे। एमबीबीएस करने यूक्रेन गए ताहिर के परिवारीजन का कहना है कि हम भारत सरकार के शुक्रगुजार हैं कि हमारा बच्चा सुरक्षित घर वापस आ पा रहा है। भाई हासिफ हुसैन ने बताया कि भारतीय दूतावास की मदद से ताहिर खार्की से कीव पहुंचा। यहां पोलैंड की सीमा पर उसे लाया गया। मंगलवार को वह साथियों के साथ पोलैंड के एयरपोर्ट पहुंच गया। संभावना है कि बुधवार सुबह ये सभी दिल्ली पहुंच जाएंगे। यहां से फिर लखनऊ आएंगे।
हंगरी बॉर्डर के लिए रवाना किए गए छात्र
यूक्रेन में फंसे लखनऊ के मनोज यादव ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर बताया कि डीनिप्रो में पांच दिन तक फंसे रहने के बाद अब दूसरे छात्रों के साथ उन्हें निकाला गया है। बताया कि बस से हमें हंगरी बॉर्डर की तरफ ले जाया गया है। पोलैंड और रोमानिया के अलावा हंगरी से भी भारत बच्चों को वापस लाने की कार्यवाही कर रहा है। एमबीबीएस की पढ़ाई करने गए मनोज व उनके साथियों ने पहले ही निकलने की कोशिश की थी, लेकिन फ्लाइटें निरस्त होने से सभी फंस गए।
आज भी कुछ बच्चे पहुंचेंगे राजधानी
यूक्रेन से मंगलवार को मुंबई के रास्ते लखनऊ पहुंचे पांचों बच्चों का एयरपोर्ट पर जिला प्रशासन के अधिकारियों ने स्वागत किया। अफसरों ने बताया कि कुछ बच्चे बुधवार को भी लखनऊ पहुंचेंगे। एडीएम वित्त बिपिन कुमार मिश्रा ने बताया कि लखनऊ के बच्चों को सकुशल लाने के लिए परिवारीजन और यूक्रेन में भारतीय दूतावास से लगातार संपर्क किया जा रहा है। प्रयास है कि सभी बच्चे सकुशल घर वापस आ जाएं। मुंबई से एक फ्लाइट से पांच बच्चे लखनऊ आए हैं। इनमें से दो लखनऊ के और बाकी कानपुर, गोंडा और शाहजहांपुर के हैं। बुधवार को दिल्ली से आने वाली फ्लाइट में भी कुछ बच्चे वापस आएंगे। जिला प्रशासन ने इनका स्वागत कर घर पहुंचाने की व्यवस्था की है।