संजय गांधी पीजीआई में हुआ कार्यक्रम।
लखनऊ। टाइप-1 डायबिटीज सामान्य डायबिटीज से पूरी तरह से अलग है। इसलिए इसका प्रबंधन भी अलग होता है। इसके लिए नियमित इंसुलिन लेने के साथ ही ब्लड शुगर की जांच जरूरी है। संजय गांधी पीजीआई में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में यह जानकारी दी गई।
डॉ. प्रीति दबडगांव ने बताया कि टाइप-1 डायबिटीज में अग्न्याशय इंसुलिन नहीं बनाता है। वहीं, टाइप-2 में शरीर इंसुलिन का ठीक से उपयोग नहीं कर पाता है या कम मात्रा में इंसुलिन बनाता है। टाइप-1 सामान्य रूप से जन्मजात बीमारी होती है, जबकि टाइप-2 सामान्य रूप से जीवनशैली और जेनेटिक्स से जुड़ा होता है। प्रो. वी. भाटिया ने बताया कि देश में इस समय करीब 10 लाख लोग टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित हैं। अमेरिका के बाद दुनिया में यह दूसरी सबसे बड़ी संख्या है। देश में हर साल करीब 35 हजार बच्चे और किशोर इसकी जद में आ रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने नृत्य और गायन के कार्यक्रम प्रस्तुत किए।