इंदिरानगर के अबरारनगर में कुकरैल के किनारे शनिवार शाम पानी से भरे 20 फीट के गड्ढे में डूबकर किशोरी और बालक की मौत हो गई। मौके पर मौजूद सेना के जवान ने दोनों को बाहर निकाला, पर इनकी जान नहीं बच सकी।अबरारनगर में झोपड़ी डालकर रहने वाले जुनैद सब्जी बेचते हैं। उनका बेटा कासिम (10) पांच बजे शौच के लिए कुकरैल नदी के किनारे गया था। उसके साथ पड़ोस की झोपड़ी में रहने वाले टेंपो चालक मुश्ताक की बेटी शिफा (13) भी थी। रास्ते में मेड़ से दोनों का पैर फिसल गया और वे पानी से भरे गड्ढे में जा गिरे।
गड्ढा गहरा होने से दोनों डूबने लगे। वहां मौजूद सेना के जवानों ने परिजनों को सूचना दी। कुछ ही देर में भीड़ जमा हो गई। दोनों को गड्ढे से निकालकर भरत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। इंस्पेक्टर इंदिरानगर सुनील कुमार तिवारी के मुताबिक शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए गए हैं। परिजनों ने कोई तहरीर नहीं दी है।
सीपीआर दी, पर नहीं बची जान
सैन्यकर्मी शिरोमणि ने दोनों को बचाने के लिए गड्ढे में छलांग लगा दी। 15 मिनट खोजने के बाद बाल पकड़कर बाहर निकाला। साथ ही सीपीआर दिया, लेकिन दोनों की जान नहीं बच सकी।
बेटे की मौत की खबर सुन मां बेसुध
कासिम की मौत की खबर सुनते ही मां रजिया बेसुध हो गईं। परिजनों ने किसी तरह उन्हें संभाला। बेटे का शव देख उनके आंसू थमने का नाम ही नहीं ले रहे थे। कासिम का छोटा भाई हाशिम, हस्सु व मंतसा है। कासिम पास के मदरसे में कक्षा दो का छात्र था।
हंसमुख मिजाज थी शिफा
शिफा की मां शहजादी ने बताया कि बेटी हंसमुख थी। दो दिन पहले पड़ोस में जन्मदिन की पार्टी में उसने कासिम व अन्य बच्चों के साथ खूब मस्ती की। बेटी का शव देख वह बेहोश हो गईं। शिफा के परिवार में बहन खुशी, गुलफशा व भाई रिजवान है।
लोगों ने की प्रदर्शन की कोशिश
हादसे के बाद लोगों ने प्रदर्शन करने की कोशिश की। पुलिस अधिकारियों ने उन्हें समझा- बुझाकर शांत कराया। कासिम की मां रजिया के मुताबिक उनके घर के पीछे रिवर फ्रंट का काम चल रहा था। इसी के लिए गड्ढा खोदा गया था, जिसमें शुक्रवार रात हुई बारिश से पानी भर गया। गड्ढे के किनारे बैरिकेडिंग कर दी गई होती तो बच्चों की जान न जाती।
चार-चार लाख का मिलेगा मुआवजा
जिलाधिकारी सूर्यपाल गंगवार ने पीड़ित परिजनों को चार-चार लाख रुपये का मुआवजा दिए जाने की बात कही। इसके साथ ही हादसे को लेकर सदर तहसील से रिपोर्ट भी मांगी है।