करीब दो महीने तक चले सियासी महासंग्राम के बीच एक रोचक तथ्य यह है कि चुनाव लड़ने वाले नेताओं में 80 फीसदी से अधिक नेता तो अपनी जमानत भी नहीं बचा पाते।
इन्हें इतना भी वोट नहीं मिलता कि ये चुनाव आयोग से जमानत की रकम वापस ले सकें। औसत 10 से 15 फीसदी नेता ही अपनी जमानत बचा पाते हैं।
विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए हर प्रत्याशी को पांच हजार रुपये की जमानत राशि जमा करनी होती है।
जमानत राशि तभी वापस मिलती है जब प्रत्याशी को अपनी विधानसभा में पड़े कुल वैध मतों का छठा हिस्सा पाना जरूरी होता है। वर्ष 2012 के चुनाव को देखा जाए तो सूबे की 403 विधानसभा सीटों के लिए 6839 प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे।
इनमें से 403 सीटों पर जीतने वाले उम्मीदवारों के अलावा केवल 676 प्रत्याशी ही जमानत बचाने में कामयाब रहे। यानी 84 फीसदी नेताओं की चुनाव में जमानत जब्त हो गई।
इससे पहले वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव में भी 403 सीटों के लिए 6086 प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे। इसमें से 83 फीसदी प्रत्याशी भी अपनी जमानत राशि नहीं बचा पाए।
केवल चुनाव जीतने वाले प्रत्याशियों के अलावा 649 नेता ही अपनी जमातन बचा सके। वर्ष 2002 के चुनाव में भी 80 फीसदी नेता अपनी जमानत धनराशि नहीं बचा पाए। केवल 708 प्रत्याशी ही अपनी जमानत बचा सके।