दिल्ली के निजी अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही ने एक मरीज की नई जिंदगी की आस छीन ली। ब्रेनडेड रिटायर्ड चुनाव अधिकारी अवध बिहारी का लिवर दिल्ली तो पहुंच गया, लेकिन देर से पहुंचने के कारण प्रत्यारोपित नहीं किया गया।
ट्रांसप्लांट के नियमों के अनुसार ब्रेन डेड व्यक्ति के शरीर से लिवर को निकालने और उसे अन्य मरीज को आठ घंटे के अंदर प्रत्यारोपित किया जाना चाहिए। दिल्ली-लखनऊ की सामान्य फ्लाइट से लिवर को ले जाने की कोशिश गलत साबित हुई।
ट्रांसप्लांट को टाल दिया गया। लिवर को शोध के लिए सुरक्षित रखा गया है। ब्रेन डेड रिटायर्ड चुनाव अधिकारी अवध बिहारी सिन्हा के बेटे-बेटी ने बुधवार को मानवता के तहत जो फैसला लिया था, वह दिल्ली के निजी अस्पताल के प्रबंधन की लापरवाही से बेकार चला गया।
केजीएमयू प्रशासन ने अवध बिहारी सिन्हा का लिवर निर्धारित समय सीमा में निकाला और उसे मात्र 20 मिनट 30 सेकेंड के अंदर एयरपोर्ट पर सुरक्षित पहुंचा दिया। दिल्ली से लखनऊ लिवर को ले जाने के दौरान लापरवाही बरती गई।
एयर एम्बुलेंस की जगह उसे सामान्य फ्लाइट से ले जाया गया। इसके चलते लगभग 9.47 बजे एयरपोर्ट पहुंचने के बावजूद लिवर को बुधवार की गो एयर की रात 11.40 बजे वाली फ्लाइट से ले जाया गया। करीब एक घंटे का समय एयरपोर्ट पर ही बरबाद हो गया। इसके बाद दिल्ली एयरपोर्ट से निजी अस्पताल पहुंचने में भी काफी समय लगा।