इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (आईआईसी) के वैज्ञानिकों ने अपने अध्ययन में यह महत्वपूर्ण सफलता पाई है।
अध्ययन के मुताबिक, सेंट्रल ड्रग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीडीआरआई), लखनऊ द्वारा विकासित एंटी मलेरिया ड्रग आर्टीथर के साथ मिलकर हल्दी में पाया जाने वाला तत्व करक्यूमिन मलेरिया के परजीवियों को नष्ट करने में सक्षम है।
साथ ही यह परजीवियों को दोबारा हमला करने से भी रोकता है।
सीडीआरआई परिसर में मंगलवार को आयोजित 13वें डॉ. बी. मुखर्जी स्मृति व्याख्यान में आईआईएससी के वरिष्ठ वैज्ञानिक और पूर्व निदेशक प्रो. जी पद्मनाभन ने इस खोज की जानकारी दी।
केंद्र सरकार से हरी झंडी मिलने का है इंतजार
पद्मभूषण प्रो. पद्मनाभन ने बताया कि कैंसर, अल्जाइमर जैसी बीमारियों के इलाज में कारगर करक्यूमिन को मलेरिया के रोकथाम में भी प्रभावी पाया गया है।
उन्होंने बताया कि करक्यूमिन का नैनोसाइज इस सफलता को कई गुना बढ़ा देता है।
हालांकि इस कंबीनेशन के क्लीनिकल ट्रायल के लिए दो साल से केंद्र सरकार की संस्था ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) से हरी झंडी मिलने का इंतजार किया जा रहा है।
प्रो. पद्मनाभन ने बताया कि करक्यूमिन और आर्टीथर के कंबीनेशन से मलेरिया के इलाज में अकेले आर्टीथर ड्रग की तुलना में 3.6 प्रतिशत की जगह 94.7 सफलता मिली।
जरूरत है वैक्सीन तैयार करने की
प्रो. पद्मनाभन ने मलेरिया पर हाल के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि दुनिया में इस बीमारी से हर साल करीब सवा लाख लोगों की मौत हो जाती है।
इसके बावजूद इसकी रोकथाम के लिए कोई सुरक्षित वैक्सीन पूरी दुनिया में मौजूद नहीं हो सकी है।
गंभीर समस्या यह है कि मलेरिया का परजीवी भी अब प्रमुख एंटी मलेरिया दवाओं के लिए प्रतिरोधक क्षमता पैदा कर चुके हैं। ऐसे में वैक्सीन और नया एंटी मलेरिया कंबीनेशन विकसित करने की जरूरत है।