समाजवादी पार्टी अभी तक चुनाव प्रचार के दौरान मुफ्त में बैट्रीचालित रिक्शे देने का वादा पूरा नहीं कर सकी है।
सरकार इस योजना के लिए 2012 से लेकर अब तक 800 करोड़ रुपए आवंटित कर चुकी है, लेकिन दो साल बीतने पर भी यह योजना जमीनी स्तर पर उतारी नहीं जा सकी है।
शहरी ग्रामीण विकास मंत्री आजम खां ने शुरुआत में इस योजना के लिए 500 करोड़ आवंटित किए थे वहीं, 2014-15 के बजट में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी इस योजना के लिए 300 करोड़ का ऐलान किया है।
क्या कहा था मुलायम ने?
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के सरकारी आवास पर हुए एक कार्यक्रम में सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने इस योजना की जमकर तारीफ करते हुए इसे 'चमत्कारी काम' कह दिया था।
मुलायम ने कहा था कि यह चमत्कारी काम है और मैं चाहता हूं कि दूसरे मंत्री भी इस तरह के काम करें।
उन्होंने इस योजना को राम मनोहर लोहिया से जोड़ते हुए कहा था कि उन्होंने कभी मानव चालित रिक्शा नहीं लिया और न ही कभी इसकी हिमायत ही की।
पार्टी ने उस दौरान यह तर्क दिया था कि यही वजह है कि पार्टी वर्तमान में चल रहे रिक्शों की जगह बैट्रीचालित रिक्शा चलाने के पक्ष में है।
मुलायम ने यह भी कहा था, मैंने अखिलेश से पैसे की चिंता किए बिना इस योजना को लागू करने को कहा है।
बनी छह सदस्यीय समिति
इस योजना को कैसे आकार देना है, इसके लिए आजम खां ने एक छह सदस्यीय एक्सपर्ट कमेटी भी गठित की।
कमेटी में डॉ. जयंत चटर्जी (आईआईटी कानपुर) प्रोफेसर सुशील कुमार (आईआईएम लखनऊ) विनोद कुमार कथूरिया (चार्टेड इंजीनियर) के.आर राजगोपाल (आईआईटी दिल्ली) रोशन अली कुरैशी (रजिस्ट्रार, जौहर यूनिवर्सिटी, रामपुर) और वी.के तिवारी (प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनईडीए) सदस्य बने।
पिछले साल फरवरी में ट्रायल पर13 कंपनियों ने 23 मॉडल पेश किए और इस समिति ने छह कंपनियों के मॉडल्स पर मुहर लगाई, जिसमें तीन दिल्ली की इलेक्ट्रिक ऑटो प्राइवेट लिमिटेड, एक्सएस बाइक्स एंड पेलाटिनो ऑटोमोटिव्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनियां हैं।
इसके अलावा एक कंपनी एचबीएल पावर सिस्टम गुड़गांव, पूर्ति ग्रीन टेक्नोलॉजी नागपुर और सम्मान फाउंडेशन पटना की हैं। अनुमान के मुताबिक एक रिक्शे की कीमत 60000-65000 के बीच है।