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सामने आया परिषदीय स्कूलों का कड़वा सच

Sat, 13 Sep 2014 09:44 PM IST
शैलेंद्र श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ
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सर्व शिक्षा अभियान पर भले ही अरबों रुपये खर्च किए जा हों पर स्थिति आज भी अच्छी नहीं है। कहीं बच्चों के लिए खेल का मैदान नहीं है, तो कहीं निशक्तों के लिए रैंप नहीं है।
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स्कूल बना दिए गए तो बाउंड्रीवाल नहीं बनाई गई। यह तथ्य सर्व शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना निदेशालय की ओर से हाल ही में कराए गए सर्वे में सामने आए।

रिपोर्ट को देखते हुए परियोजना निदेशालय ने बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया है कि स्कूलों में बचे काम जल्द पूरे कराए जाएं जिससे बच्चों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को अनिवार्य शिक्षा देने की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही परिषदीय स्कूलों में बच्चों को सभी व्यवस्थाएं देना अनिवार्य है।
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लापरवाह अफसरों के खिलाफ होगी कार्रवाई

बेसिक शिक्षा के लिए सरकार हर साल अरबों रुपये खर्च करती है। इसके बाद भी परिषदीय स्कूलों में आज तक बेहतर इंतजाम नहीं हो पाए हैं।

स्कूल तो बना दिए गए हैं लेकिन बाउंड्रीवाल बनी है और न ही खेल मैदान की व्यवस्था की गई है। कई स्कूलों में शौचालय तक नहीं बनाए गए न ही पेयजल के समुचित इंतजाम किए गए। यह स्थिति तब है जब दो साल से कोई नया स्कूल सरकार ने स्वीकृत नहीं किया गया है।

रिपोर्ट आने के बाद सर्व शिक्षा अभियान का राज्य परियोजना निदेशालय इसके लिए गंभीर है। अब वह लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।

प्राइमरी स्कूल--1,13,627
उच्च प्राइमरी स्कूल--45,749
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ये है परिषदीय स्कूलों का हाल

- शौचालय विहीन स्कूल--3318
- बाउंड्रीवाल विहीन स्कूल--56810
- 3,610  स्कूलों में हैंडपंप नहीं
- 53,725 स्कूलों में खेल मैदान नहीं
- 26,186 स्कूलों में रैंप नहीं

इस पर सर्व शिक्षा अभियान की राज्य परियोजना निदेशक कुमुदलता श्रीवास्तव का कहना है कि सर्व शिक्षा अभियान के तहत बने स्कूलों में जहां भी कमी है उसे जल्द ही ठीक करने का निर्देश बेसिक शिक्षा अधिकारियों को दे दिया गया है। गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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