प्रदेश में नवंबर 2011 को छोड़कर अब तक आयोजित शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) में 82 अंक पाने वाले आरक्षित वर्ग के परीक्षार्थियों को पास माना जाएगा। अभी कुछ सत्र में 83 अंक तो कुछ में 82 अंक पर पास माना जा रहा है।
बेसिक शिक्षा विभाग इस अंतर को समाप्त करने जा रहा है। उच्चाधिकारियों की बैठक में इसको लेकर सहमति बन गई है और जल्द ही बेसिक शिक्षा मंत्री से मंजूरी के बाद शासनादेश जारी कर दिया जाएगा।
150 अंकों के टीईटी में न्यूनतम 60 प्रतिशत अंक पाने वाले को पास माना जाता है। सामान्य वर्ग के परीक्षार्थियों को 90 अंक मिलने पर पास किया जाता है।
आरक्षित वर्ग वालों को पांच प्रतिशत छूट के साथ नियमानुसार 82.5 अंक पर पास माना जाना चाहिए, लेकिन उन्हें 83 अंक पर पास किया जा रहा है। इस संबंध में हाईकोर्ट में आए दिन मुकदमे होते रहते हैं।
यूपी में अलग-अलग व्यवस्था पर सवाल
इसमें यही तर्क दिया जाता है कि केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (सीटीईटी) में 82 अंक पर ही पास किया जाता है, जबकि उत्तर प्रदेश में अलग-अलग व्यवस्था है।
इसलिए टीईटी में आरक्षित वर्ग के पास करने का अंतर समाप्त करते हुए एक समान व्यवस्था कर दी जाए। इसके आधार पर ही यह सहमति बनी है कि अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित, भूतपूर्व सैनिक (स्वयं) तथा नि:शक्त श्रेणी के परीक्षार्थियों को न्यूनतम 55 प्रतिशत यानी 82 अंक पर पास माना जाए।
इसके आधार पर बेसिक शिक्षा मंत्री को प्रस्ताव भेजा गया है।
शिक्षक भर्ती पर भी हुआ बड़ा फैसला
प्राथमिक विद्यालयों में 72825 प्रशिक्षु शिक्षकों की भर्ती के मामले में बने भ्रम को सरकार ने दूर कर दिया है। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) ने शुक्रवार को सभी डायट प्राचार्य व बेसिक शिक्षा अधिकारियों को शासनादेश भेजकर सभी बिंदुओं पर स्थिति साफ कर दी है।
अनारक्षित श्रेणी के अभ्यर्थी जिनके स्नातक में 45 प्रतिशत अंक हैं, वे भी काउंसलिंग में शामिल किए जाएंगे। वहीं आरक्षित श्रेणी के 40 प्रतिशत अंक वालों को भी भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने का निर्णय लिया गया है।
इग्नू एवं राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय से दो वर्ष का पत्राचार बीएड करने वालों को भी इस भर्ती के लिए पात्र माना गया है।
इन प्रशिक्षु शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया में कई दिक्कतें आ रही थीं, जिन्हें राज्य स्तर पर गठित समस्या निवारण समिति के सामने रखा गया। इस समिति ने 10 सितंबर को आयोजित बैठक के बाद अपनी रिपोर्ट सचिव बेसिक शिक्षा परिषद को सौंप दी।