ऊंचाहार से अजीत बिसारिया की रिपोर्ट
नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन (एनटीपीसी) की जिस छठी यूनिट में बुधवार को भीषण हादसा हुआ उसके बॉयलर के सेफ्टी वॉल्व सोमवार से ही ठीक से काम नहीं कर रहे थे। इसको लेकर टेक्नीशियनों ने आगाह भी किया था। पर, एनटीपीसी के आला अफसरों ने उन चेतावनियों को दरकिनार कर दिया। इस घोर लापरवाही से हादसा हुआ। बृहस्पतिवार को मौतों का आंकड़ा 30 तक पहुंच गया। गंभीर रूप से झुलसे एजीएम संजीव शर्मा की भी लखनऊ के एक निजी अस्पताल में मौत हो गई।
हादसे के कारणों का पता लगाने को हम एनटीपीसी पहुंचे तो गेट पर ही हमारी मुलाकात एक टेक्नीशियन से होती है। ये टेक्नीशियन हादसे के वक्त प्लांट में ही मौजूद थे। नाम न छापने की शर्त पर वे बताते हैं कि जांच में सोमवार को ही पता चल गया था कि सेफ्टी वॉल्व चोक हो चुके हैं। सेफ्टी वॉल्व का चोक होना साफ इशारा है कि किसी भी क्षण कोई बड़ा हादसा हो सकता है। फिर भी प्लांट को चालू रखा गया। बेहद गुस्से में वे कहते हैं, यूनिट नंबर-6 का अलार्म सिस्टम तक दुरुस्त नहीं किया गया था। 5-7 मिनट पहले भी खतरे की घंटी बज गई होती तो शायद कुछ जानें बच गई होतीं।
एनटीपीसी हादसे में जारी है मौतों का सिलसिला, अब तक 30 की जान गई, पढ़ें-पूरी खबर
देखें तस्वीरें- NTPC हादसा: बॉयलर फटा और हर तरफ बिखर गई लाशें, मची चीख-पुकार
लोहे के एंगल गल कर गिरने लगे...अंदाजा लगाइए हालात कैसे रहे होंगे
यह टेक्नीशियन बताते हैं जब बॉयलर फटा तो लोहे के मोटे-मोटे एंगल गलकर गिरने लगे। वे कहते हैं, आप खुद अंदाजा लगाइए कि चपेट में आने वालों का हश्र कैसा रहा होगा। जो कामगार सेफ्टी बेल्ट पहनकर काम कर रहे थे, उन्हें बेल्ट खोलने तक का वक्त नहीं मिला।