यूपी बोर्ड की कक्षा नौ की अर्द्धवार्षिक परीक्षा सहायता प्राप्त और वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों के लिए मुसीबत बन गई है। दरअसल, परीक्षा का एक भाग ओएमआर शीट पर होना है और शीट का प्रबंध स्कूलों को अपने स्तर से करना है। इस निर्णय से उन विद्यालयों के सामने अधिक समस्या है, जिन्हें कोई ग्रांट नहीं मिलती और न ही वे छात्रों से फीस लेते हैं। ऐसे में उन्हें उत्तर पुस्तिका, ओएमआर शीट और प्रश्न पत्र छपवाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
बोर्ड अगले सत्र से ओएमआर शीट पर परीक्षा करवा सकता है। इसको लेकर बोर्ड ने इसी सत्र से कक्षा नौ की परीक्षा ओएमआर शीट पर करवाने के निर्देश दिए हैं। परीक्षा 70 अंकों की होगी, जिसमें से 20 अंक की परीक्षा ओएमआर शीट पर होगी। प्रश्न बहुविकल्पीय होंगे। 50 अंक की परीक्षा वर्णात्मक और 30 अंक आंतरिक मूल्यांकन के होंगे। इसके लिए बोर्ड ने तैयारियों को लेकर स्कूलों को शीट की सैंपल कॉपी भेज दी है।
बदलनी पड़ रही परीक्षा की तारीख
राजकीय जुबिली इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य धीरेंद्र मिश्रा ने बताया कि 15 नवंबर से परीक्षा होनी थी। दो नवंबर को ओएमआर शीट पर परीक्षा कराने का निर्देश आने के बाद प्रश्न पत्र और उत्तर पुस्तिका की छपवाई रुकवानी पड़ी। अब इसके साथ ओएमआर शीट भी छपवानी पड़ेगी। प्रश्न पत्र में 20 अंकों के बहुविकल्पीय प्रश्न शामिल किए जाएंगे।
परीक्षा की अगली तारीख बाद में घोषित की जाएगी। ऐसा कई विद्यालयों को करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि शीट को लेकर बोर्ड अधिकारी से बात की तो पता चला कि शीट कंप्यूटराइज्ड की जगह आम पेपर पर छपवानी है। कॉपी भी आम तरीके से शिक्षकों से जंचवानी होगी। प्रत्येक स्कूल खुद ही ओएमआर शीट का प्रबंध करना होगा।
खर्च स्कूलों के सिर पर
अमीनाबाद इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य एसएल मिश्रा ने बताया कि अब एक ही विषय के दो-दो प्रश्न पत्र व उत्तर पुस्तिका छपवानी पड़ेंगी। इसका अतिरिक्त भार हमें ही वहन करना है। छात्रों को प्रश्न पत्र दो बार पढ़ना होगा। इसके लिए परीक्षा के अलावा अतिरिक्त समय देना होगा। एक ही विषय का शिक्षक दो बार कॉपियों को जांचेगा। बोर्ड ने ऐसी कई व्यवहारिक समस्याओं को लेकर कोई दिशा-निर्देश नहीं दिए हैं।