रेल यात्रियों को टिकट कटाने के लिए लंबी लाइन में लगने से जल्द निजात मिलने की उम्मीद है। अनारक्षित श्रेणी के टिकट काउंटरों पर थर्मल तकनीक से अब प्रति मिनट 60 टिकट प्रिंट होंगे, जबकि वर्तमान में प्रति मिनट महज दो से तीन टिकट ही प्रिंट हो रहे हैं।
ऐसे में यात्रियों को टिकट जल्दी मिलेंगे और लंबी कतारें लगने की गुंजाइश खत्म हो जाएगी। इस बाबत रेलवे बोर्ड ने तैयारियां कर ली हैं। दिल्ली में यह तकनीक सफल रही है। जल्द ही चारबाग रेलवे स्टेशन पर इसे शुरू करने की योजना है।
उत्तर रेलवे दिल्ली मंडल के दिल्ली, नई दिल्ली व निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन पर थर्मल तकनीक से टिकटों की प्रिंटिंग का ट्रायल सफल रहा। दिल्ली मंडल के बाद लखनऊ मंडल के चारबाग रेलवे स्टेशन पर थर्मल तकनीक से टिकटों की प्रिंट के बाबत तैयारियां की जा रही हैं।
हाल ही में दिल्ली में चारबाग रेलवे स्टेशन के अधिकारियों की बैठक हुई है। जहां योजना लखनऊ में शुरू करने पर विचार-विमर्श हुआ है। अधिकारियों ने बताया कि थर्मल तकनीक के साथ-साथ वर्तमान रेलवे टिकट का कलेवर भी बदलने की बात चल रही है। मसलन, टिकट का साइज कम किया जा सकता है। हालांकि, फॉर्मेट में बदलाव की अभी कोई तैयारी नहीं है।
रोज बनती हैं 23 हजार टिकटें
डेमो
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थर्मल तकनीक पर काम करने वाले यह टिकट सिर्फ अनारक्षित श्रेणी के टिकट काउंटरों पर ही इस्तेमाल नहीं होंगे, बल्कि इन्हें ऑटोमेटिक टिकट वेंडिंग मशीन (एटीवीएम) में भी प्रयोग किया जाएगा।
अनारक्षित श्रेणी के इन टिकटों पर बारकोड भी होगा, जिससे यात्रा की डिटेल को आसानी से ट्रेस किया जा सकेगा। दरअसल, इसके लिए यात्री को एक एप्लीकेशन डाउनलोड करना होगा, जिससे बारकोड को स्कैन करने के बाद टिकट की डिटेल व ट्रेन की स्थिति की जानकारी मिल सकेगी।
एप्लीकेशन पर काम चल रहा है। फिलहाल चारबाग स्टेशन पर एटीवीएम से जहां रोजाना औसतन आठ सौ टिकटें बनती हैं वहीं अनारक्षित श्रेणी के काउंटर से साढ़े 22 हजार टिकटें बनती हैं।
‘यूटीएस टिकट जल्द ही नए कलेवर में आएगा, जो छोटा, किफायती व बारकोड वाला होगा। थर्मल पेपर पर प्रिंट होने की वजह से प्रति मिनट करीब 60 टिकट प्रिंट हो सकेंगे, जिससे कतार में लगे यात्रियों को जल्द टिकट मिल सकेंगे। दिल्ली, नई दिल्ली, निजामुद्दीन स्टेशनों पर ट्रायल चल रहा है, जिसके सकारात्मक रिजल्ट आ रहे हैं।’ -विवेक श्रीवास्तव, चीफ कॉमर्शियल मैनेजर (पैसेंजर मार्केटिंग), उत्तर रेलवे